दिल्ली 29 फ़रवरी 2016 को सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रम में स्कूली बच्चों के लिए मानव पेपिलोमा वायरस (एचपीवी) वैक्सीन लांच करने वाला देश का पहला राज्य बन गया.
एचपीवी वैक्सीन लोगों को लगभग 150 प्रकार के एचपीवी एस (HPVs), जिनमें से कुछ गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर (सर्वीकल कैंसर) का कारण बन सकते हैं, से बचाता है.
एचपीवी वैक्सीन लोगों को लगभग 150 प्रकार के एचपीवी एस (HPVs), जिनमें से कुछ गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर (सर्वीकल कैंसर) का कारण बन सकते हैं, से बचाता है.
कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएं-
• कार्यक्रम के तहत सरकारी स्कूलों में छठी कक्षा में अध्ययन बालिकाओं को पहले साल में लक्षित किया जाएगा. वर्तमान शैक्षणिक सत्र में इसे दो चरणों में पूरा किया जाएगा.
• कार्यक्रम के पहले चरण में 1-1.5 लाख बालिकाओं को लक्षित किया जाएगा.
• बच्चे को टीके की दो खुराक दी जाएगी. पहली और दूसरी खुराक के बीच 30 दिनों का अंतर रखा जाएगा.
• कार्यक्रम के अगले चरण में पहले टीके से 240 दिनों के भीतर तीसरी बूस्टर खुराक दी जाएगी.
• दिल्ली सरकार ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन (जीएसके) और एमएसडी फार्मास्यूटिकल्स से 450 रुपये प्रति खुराक की दर से रियायती दर पर टीकों की खरीद करेगी.
मानव पेपिलोमा वायरस के बारे में-
• मानव पेपिलोमा वायरस, पेपिलोमा वायरस परिवार का डीएनए वायरस है. जो मनुष्य को संक्रमित करने में सक्षम है.
• सभी पेपिलोमा वायरस की तरह, एचपीवी एस (HPVs), केवल त्वचा या श्लेष्मा झिल्ली की केरेटिन कोशिकाओं में संक्रमण करता है.
• अधिकतर एचपीवी संक्रमण उपनैदानिक हैं और इनके कोई शारीरिक लक्षण प्राथमिक तौर पर दिखाई नहीं देते. हालांकि कुछ लोगों में उपनैदानिक संक्रमण, नैदानिक हो सकते हैं और सौम्य पेपिलोमाज, प्रेमालिग्नेंट घाव गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर (सर्वीकल कैंसर) का कारण बन सकते है.
• विशेष रूप से एचपीवी 16 और एचपीवी 18 लगभग 70% गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर के कारण बनते हैं.
• शोधकर्ताओं ने 170 से अधिक प्रकार के एचपीवी की पहचान की है. उनमे से 40 से अधिक आम तौर पर यौन संपर्क के माध्यम से फैलता है और एनोजेनिटल (anogenital) क्षेत्र को संक्रमित करता हैं.
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