छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय कवि, पूर्व सांसद और पूर्व विधायक पवन दीवान का 2 मार्च 2016 को निधन हो गया. वे 71 वर्ष के थे.
पवन दीवान का निधन गुडग़ांव स्थित मेदांता अस्पताल में हुआ, वे कुछ समय से अस्वस्थ थे. भागवत कथावाचक के रूप में छत्तीसगढ़ में पहचान बनाने वाले संत कवि पवन दीवान ने अपने जीवन के कई महत्वपूर्ण साल राजनीति में गुजारे
पवन दीवान का निधन गुडग़ांव स्थित मेदांता अस्पताल में हुआ, वे कुछ समय से अस्वस्थ थे. भागवत कथावाचक के रूप में छत्तीसगढ़ में पहचान बनाने वाले संत कवि पवन दीवान ने अपने जीवन के कई महत्वपूर्ण साल राजनीति में गुजारे
पवन दीवान
• वे विधायक एवं मंत्री पद पर रहे. इसके अतिरिक्त वे सांसद पद के लिए भी दो बार चुने गए.
• जनसंघ से राजनीति शुरू करने वाले पवन दीवान कांग्रेस में गए, फिर कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए, भाजपा से फिर कांग्रेस और फिर भाजपा में प्रवेश किया.
• 1977 की जनता लहर में उन्हें छत्तीसगढ़ के गांधी की उपमा दी गई.
• छत्तीसगढ़ गठन के बाद दीवान ने छत्तीसगढ़ राज्य गौ-सेवा आयोग के अध्यक्ष के रूप में भी जनता को अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं दीं.
• उनकी कविताओं में छत्तीसगढ़ की संस्कृति, दीन-दलितों की पीड़ा और शोषण के विरुद्ध आक्रोश झलकता है.
• वे विधायक एवं मंत्री पद पर रहे. इसके अतिरिक्त वे सांसद पद के लिए भी दो बार चुने गए.
• जनसंघ से राजनीति शुरू करने वाले पवन दीवान कांग्रेस में गए, फिर कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए, भाजपा से फिर कांग्रेस और फिर भाजपा में प्रवेश किया.
• 1977 की जनता लहर में उन्हें छत्तीसगढ़ के गांधी की उपमा दी गई.
• छत्तीसगढ़ गठन के बाद दीवान ने छत्तीसगढ़ राज्य गौ-सेवा आयोग के अध्यक्ष के रूप में भी जनता को अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं दीं.
• उनकी कविताओं में छत्तीसगढ़ की संस्कृति, दीन-दलितों की पीड़ा और शोषण के विरुद्ध आक्रोश झलकता है.
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