प्रसिद्ध कवि डॉ भगवती लाल व्यास को 2 मार्च 2016 को वर्ष 2015 के बिहारी पुरस्कार हेतु चयनित किया गया. उन्हें उनके राजस्थानी काव्य संग्रह ‘कथा सुन आवे है शब्द’ के लिए चुना गया.
साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता रह चुके डॉ व्यास ने अपनी कविताओं के जरिये देश में बढ़ते औद्योगीकरण एवं घटती मानवीयता पर प्रकाश डाला है.
साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता रह चुके डॉ व्यास ने अपनी कविताओं के जरिये देश में बढ़ते औद्योगीकरण एवं घटती मानवीयता पर प्रकाश डाला है.
भगवती लाल व्यास
• पेशे से शिक्षक रहे व्यास की प्रकाशित कृतियों में ‘सूरज लीलती घाटियां’, ‘शताब्दी निरूत्तर’, ‘फुटपाथ पर चिड़िया नाचती है’, ‘शिखर की पीड़ा’, ‘अणहद नाद’ और ‘अगनी मंतर’ आदि प्रमुख हैं.
• पुरस्कृत कृति ‘कठा सूं आवे है सबद’ काव्य संग्रह में उनकी व्यापक मानवीय दृष्टि और सहज काव्याभिव्यक्ति की झलक देखने को मिलती है.
• वर्ष 1988 में उन्हें ‘अणहद नाद’ के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित व्यास को राष्ट्रीय स्तर और प्रांतीय स्तर पर कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है.
बिहारी पुरस्कार
• बिहारी पुरस्कार की स्थापना के के बिड़ला फाउंडेशन द्वारा वर्ष 1991 में कवि बिहारी के नाम पर की गयी .
• 1991 से अब तक यशवंत व्यास, अलका सरावगी, ओम थानवी जैसे लेखकों को यह सम्मान मिल चुका है.
• इस पुरस्कार के तहत एक प्रशस्ति पत्र, एक प्रतीक चिन्ह और एक लाख रूपये की नकद राशि दी जाती है.
• यह पुरस्कार प्रत्येक वर्ष राजस्थान के किसी लेखक की उत्कृष्ट हिंदी-राजस्थानी कृति को दिया जाता है.
• पेशे से शिक्षक रहे व्यास की प्रकाशित कृतियों में ‘सूरज लीलती घाटियां’, ‘शताब्दी निरूत्तर’, ‘फुटपाथ पर चिड़िया नाचती है’, ‘शिखर की पीड़ा’, ‘अणहद नाद’ और ‘अगनी मंतर’ आदि प्रमुख हैं.
• पुरस्कृत कृति ‘कठा सूं आवे है सबद’ काव्य संग्रह में उनकी व्यापक मानवीय दृष्टि और सहज काव्याभिव्यक्ति की झलक देखने को मिलती है.
• वर्ष 1988 में उन्हें ‘अणहद नाद’ के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित व्यास को राष्ट्रीय स्तर और प्रांतीय स्तर पर कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है.
बिहारी पुरस्कार
• बिहारी पुरस्कार की स्थापना के के बिड़ला फाउंडेशन द्वारा वर्ष 1991 में कवि बिहारी के नाम पर की गयी .
• 1991 से अब तक यशवंत व्यास, अलका सरावगी, ओम थानवी जैसे लेखकों को यह सम्मान मिल चुका है.
• इस पुरस्कार के तहत एक प्रशस्ति पत्र, एक प्रतीक चिन्ह और एक लाख रूपये की नकद राशि दी जाती है.
• यह पुरस्कार प्रत्येक वर्ष राजस्थान के किसी लेखक की उत्कृष्ट हिंदी-राजस्थानी कृति को दिया जाता है.
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