केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 7 जनवरी 2016 को वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए 1 अप्रैल 2020 से भारत स्टेज (बीएस) VI मानकों को लागू करने का फैसला किया है. यह फैसला अंतर– मंत्रालयी बैठक में किया गया. बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने की.
- वर्तमान में बीएस–IV उत्सर्जन मानक का कार्य प्रगति पर है. इस प्रक्रिया के तहत बीएस– V मानकों को छोड़कर बीएस–IV मानक, बीएस– VI मानकों में परिवर्तित कर दिए जाएंगे.
- इसमे शामिल उत्तर भारत के जम्मू और कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली और राजस्थान एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बीएस– IV पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति की जाती है.
- देश में अन्य जगहों पर देश में बीएस– III ग्रेड का ईंधन ऑटो वाहनों को उपलब्ध कराया जाता है.
- 1 अप्रैल 2016 से गोवा, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना, ओडीशा, केंद्र शासित प्रदेश दमन और दीव, दादर–नगर– हवेली और अंडमान एवं निकोबार में बीएस–IV ईंधन मिलने लगेगा.
- देश के बाकी बचे इलाकों में 1 अप्रैल 2017 से बीएस–IV ईंधन की आपूर्ति की जानी निर्धारित है.
- बीएस–V में वाहनों में डीजल पार्टिकुलेट फिल्टर लगाया जाना है जिसे भारत की सड़कों की स्थिति के अनुकूल किए जाने की जरूरत है.
- चरण VI में चयनात्मक उत्प्रेरक कमी प्रौद्योगिकी (सलेक्टिव कैटेलिटिक रिडक्शन टेक्नोलॉजी) को अनुकूलित किया जाना है.
- प्रत्येक चरण पर प्रौद्योगिकी को 6 लाख से 7 लाख किलोमीटर से अधिक के लिए मान्य करना होगा.
फैसले के नतीजे-
पेट्रोल कारों पर
• नाइट्रोजन के ऑक्साइड में लगभग 25% की कमी
डीजल कारों पर
• हाइड्रोकार्बन और नाइट्रोजन ऑक्साइड में करीब 43% की कमी
• नाइट्रोजन के ऑक्साइड में लगभग 68% की कमी
• पार्टिकुलेट मैटर (कण पदार्थ) में लगभग 82% की कमी
हैवी ड्यूटी वाहनों पर
• हाइड्रोकार्बन्स में करीब 71% की कमी
• नाइट्रोजन ऑक्साइड में करीब 87% की कमी
• पार्टिकुलेट मैटर (कण पदार्थ) में करीब 67% की कमी
पेट्रोल कारों पर
• नाइट्रोजन के ऑक्साइड में लगभग 25% की कमी
डीजल कारों पर
• हाइड्रोकार्बन और नाइट्रोजन ऑक्साइड में करीब 43% की कमी
• नाइट्रोजन के ऑक्साइड में लगभग 68% की कमी
• पार्टिकुलेट मैटर (कण पदार्थ) में लगभग 82% की कमी
हैवी ड्यूटी वाहनों पर
• हाइड्रोकार्बन्स में करीब 71% की कमी
• नाइट्रोजन ऑक्साइड में करीब 87% की कमी
• पार्टिकुलेट मैटर (कण पदार्थ) में करीब 67% की कमी
- वर्ष 2020 तक स्वच्छ बीएस (यूरो) – IV/V ईंधन विनिर्देशों को पूरा करने के लिए पेट्रोल और डीजल की गुणवत्ता में सुधार हेतु तेल रिफाइनरियों को 80000 करोड़ रुपयों के बड़े निवेश की जरूरत होगी.
- यह उल्लिखित राशि बीएस–V मानकों के लिए जरूरी होगी.
- बीएस–V और बीएस–VI में तकनीकी तौर पर बहुत अधिक फर्क नहीं है.
- बीएस–VI मानकों के पारगमन के लिए आवश्यक इस विशाल निवेश की वजह से ऑटोमोबाइल उद्योग इसका विरोध कर रहा है.
- उद्योग का कहना है कि इससे उनके उत्पादन लागत में बढ़ोतरी होगी.
- भारत स्टेज नॉर्म्स (भारत स्टेज मानकों) के बारे में-
- भारत स्टेज उत्सर्जन मानकों को आरए माशेलकर समिति द्वारा की गई सिफारिशों के मद्देनजर वर्ष 2000 में शुरु किया गया था.
- ये वे उत्सर्जन मानक हैं जिन्हें केंद्र सरकार ने मोटर वाहन समेत आंतरिक दहन इंजन उपकरण से होने वाले वायु प्रदूषण को विनियमित करने के लिए स्थापित किया था.
- पर्यावरण एवं वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत आने वाले केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा स्थापित समयसीमा और मानकों के अनुसार अलग– अलग मानदंडों को लागू किया जाता है.
- सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैनुफक्चरर्स (एसआईएएम) ने अपने ' द ऑटो फ्यूल पॉलिसी 2003' में प्रौद्योगिकी विकसित करने में लगने वाले समय को कम कर एक वर्ष करके बीएस–VI मानकों को 2023 तक लागू करने की अनुशंसा की थी.
- केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा दिसंबर 2015 में जारी अधिसूचना के मसौदे के अनुसार बीएस–V मानकों को 2019 और बीएस– VI मानकों को 2021 में लागू करने की बात कही गई है.
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