श्रीलंका में 9 जनवरी 2016 को नए संविधान निर्माण की प्रक्रिया आरंभ की गयी इस संबंध में श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने पार्लियामेंट में एक प्रस्ताव पारित किया ताकि संविधान सभा का निर्माण किया जा सके.
नये संविधान का मुख्य उद्देश्य वर्ष 1978 में अपनाए गये संविधान को बदलना है.
वर्तमान संविधान में राष्ट्रपति को अत्यधिक शक्तियां दिए जाने से यह विवादास्पद बन चुका है जिससे राष्ट्राध्यक्ष के एकाधिकार का खतरा सदैव बना रहता है.
नये संविधान का मुख्य उद्देश्य वर्ष 1978 में अपनाए गये संविधान को बदलना है.
वर्तमान संविधान में राष्ट्रपति को अत्यधिक शक्तियां दिए जाने से यह विवादास्पद बन चुका है जिससे राष्ट्राध्यक्ष के एकाधिकार का खतरा सदैव बना रहता है.
संविधान निर्माण
• प्रस्तावित संवैधानिक सभा (सीए) में संसद सदस्यों को इसके सदस्यों के रूप में शामिल किया जायेगा.
• सीए में संविधान के अनुच्छेद 75 के अनुसार एक संविधानिक प्रस्ताव लाया जायेगा जिसके लिए लोगों से राय ली जाएगी.
• पार्लियामेंट स्पीकर संविधानिक सभा के अध्यक्ष होंगे एवं सात उपाध्यक्ष नियुक्त किये जायेंगे.
• संविधान निर्माण का कार्य 17 सदस्यों द्वारा मिलकर किया जायेगा.
• इसे लागू करने के लिए प्रस्ताव को श्रीलंका पार्लियामेंट द्वारा आवश्यक बहुमत मिलना अनिवार्य है.
• प्रस्तावित संवैधानिक सभा (सीए) में संसद सदस्यों को इसके सदस्यों के रूप में शामिल किया जायेगा.
• सीए में संविधान के अनुच्छेद 75 के अनुसार एक संविधानिक प्रस्ताव लाया जायेगा जिसके लिए लोगों से राय ली जाएगी.
• पार्लियामेंट स्पीकर संविधानिक सभा के अध्यक्ष होंगे एवं सात उपाध्यक्ष नियुक्त किये जायेंगे.
• संविधान निर्माण का कार्य 17 सदस्यों द्वारा मिलकर किया जायेगा.
• इसे लागू करने के लिए प्रस्ताव को श्रीलंका पार्लियामेंट द्वारा आवश्यक बहुमत मिलना अनिवार्य है.
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