सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा जल्लीकट्टू खेल पर जारी अधिसूचना पर 12 जनवरी 2016 को रोक लगा दी.
इससे पहले तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता की मांग पर पोंगल के दौरान सांड़ अथवा बैलों को काबू करने वाले खेल (जल्लीकट्टू) को मोदी सरकार ने मंजूरी प्रदान की थी. तमिलनाडु में इस खेल पर 2011 से प्रतिबन्ध लगा था.
विभिन्न गैर सरकारी संगठनों द्वारा दायर याचिका की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को इस मामले में नोटिस भी जारी किया है.
इससे पहले तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता की मांग पर पोंगल के दौरान सांड़ अथवा बैलों को काबू करने वाले खेल (जल्लीकट्टू) को मोदी सरकार ने मंजूरी प्रदान की थी. तमिलनाडु में इस खेल पर 2011 से प्रतिबन्ध लगा था.
विभिन्न गैर सरकारी संगठनों द्वारा दायर याचिका की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को इस मामले में नोटिस भी जारी किया है.
प्रतिबन्ध के कारण
• इस परंपरागत खेल में सांड़ अथवा बैलों के साथ क्रूरता के कई मामले सामने आए थे जिनके चलते इस पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया.
• वर्ष 2011 में पर्यावरण मंत्रालय ने जल्लीकट्टू पर रोक लगाई थी. बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी इस प्रतिबन्ध को सही ठहराया था.
• जल्लीकट्टू में सांड़ को काबू करने वाले व्यक्ति को लाखों रुपए का इनाम दिया जाता है. यह स्पेन में होने वाली बुल फाइट से मिलता-जुलता खेल है.
इससे पहले केंद्र सरकार द्वारा कुछ विशेष नियमों के तहत मंजूरी दी गयी थी. केंद्र सरकार द्वारा जारी इस अधिसूचना में निम्न बिंदु शामिल थे:
• पर्यावरण मंत्रालय ने 8 जनवरी 2016 को तमिलनाडु में जल्लीकट्टू, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब, हरियाणा, केरल और गुजरात में बैलगाड़ी दौड़ को मंजूरी दी थी.
• सरकार के अधिसूचना में कहा था कि इन परंपरागत खेलों के दौरान जानवरों के साथ क्रूरता न हो तथा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हों.
• जल्लीकट्टू के दौरान सांड़ या बैलों को 15 मीटर के दायरे के अंदर ही काबू किया जाए.
• बैलगाड़ी दौड़ एक खास तरह के ट्रैक पर कराई जाए, जो दो किलोमीटर से अधिक लंबा न हो.
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