नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने नमामि गंगे परियोजना हेतु फंड जारी करने पर 12 जनवरी 2016 को रोक लगा दी. इसके तहत एनजीटी ने प्रदूषण के आंकड़े उपलब्ध न कराने और लापरवाही के कारण गोमुख से कानपुर तक गंगा सफाई के लिए फंड जारी करने पर रोक लगा दी.
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने जल संसाधन मंत्रालय और राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण (एनजीआरबीए) को एमसी मेहता की ओर से दायर यचिका पर निर्देश जारी किया. इस आदेश के तहत अब बिना एनजीटी की मंजूरी के उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार को कोई भी पैसा प्राधिकरण की ओर से नहीं जारी किया जाएगा.
विदित हो कि पीठ ने उपरोक्त आदेश तब जारी किया जबकि यूपी और उत्तराखंड के अधिकारी दोनों राज्यों में नदी में बढ़ रहे प्रदूषण से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर स्पष्ट जवाब देने में असफल हो गए. एनजीटी ने अधिकारियों से कई सवाल किए व उचित जवाब नहीं मिलने पर नाराजगी जताई. सुनवाई के दौरान अधिवक्ता एमसी मेहता ने कहा कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड औद्योगिकीकरण के दौरान नदी के संरक्षण के प्रति लापरवाह हैं. मेहता ने आरोप लगाया कि दोनों ही राज्यों के पास इस संबंध में समुचित जानकारी नहीं है और कोई आंकड़ा भी नहीं है.
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