पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित मोहिनीअट्टम नृत्यांगना कलामंडलम सत्यभामा का 13 सितम्बर 2015 को निधन हो गया. वह 77 वर्ष की थी.
मोहिनीअट्टम के साथ कई प्रयोगात्मक सुधार करने वाली सत्यभामा ने इस पारंपरिक नृत्य शैली को राज्य में एक लोकप्रिय नृत्य शैली बनाया.
मोहिनीअट्टम के साथ कई प्रयोगात्मक सुधार करने वाली सत्यभामा ने इस पारंपरिक नृत्य शैली को राज्य में एक लोकप्रिय नृत्य शैली बनाया.
कलामंडलम सत्यभामा के बारे में
• कलामंडलम सत्यभामा का जन्म शोरानूर,केरल में वर्ष 1937 में हुआ था और उन्होंने मात्र 12 वर्ष की आयु में नृत्य की शिक्षा ग्रहण करना आरम्भ कर दिया था.
• उन्होंने अपने कैरियर की शुरुआत कलामंडलम विश्वविद्यालय की रजत जयंती समारोह के कार्यक्रम से की थी.
• वह कलामंडलम विश्वविद्यालय, केरल की पहली महिला उप प्रधानाचार्य नियुक्त की गईं तत्पश्चात वह वर्ष 1992 तक प्रधानाचार्या के पद पर कार्यरत रहीं.
• कलामंडलम सत्यभामा ने मलयालम भाषा में मोहिनीअट्टम- हिस्ट्री, टेकनीक एंड परफॉरमेंस शीर्षक से एक लेख भी प्रकाशित किया.
• उन्हें वर्ष 2014 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इसके अतिरिक्त उन्हें केरल संगीता नाटक अकादमी पुरस्कार (1976), संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1994), केरल सरकार के न्रुथ्य नाट्य पुरस्कारम (2005), कलामंडलम पुरस्कार (1988) से भी सम्मानित किया गया.
विदित हो मोहिनीअट्टम केरल की शास्त्रीय नृत्य शैली है जिसका हिंदी में अर्थ ‘मोहित कर लेने वाला नृत्य’ होता है.
0 comments:
Post a Comment