केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 9 सितंबर 2015 को दूरसंचार कंपनियों के लिए स्पेक्ट्रम खरीद-बिक्री नियमों को मंजूरी दी. इससे स्पेक्ट्रम के बेहतर उपयोग को बढ़ावा मिलेगा और अतिरिक्त स्पेक्ट्रम वाली कंपनियों के लिए आय के अवसर भी खुलेंगे.
नए नियम के तहत अब दूरसंचार कंपनियां आपस में स्पेक्ट्रम की खरीद-बिक्री कर सकती हैं. इसके लिए उन्हें सरकारी अनुमति की जरूरत नहीं होगी. स्पेक्ट्रम की खरीद-बिक्री के तहत अतिरिक्त स्पेक्ट्रम वाली कंपनी उस कंपनी को स्पेक्ट्रम का अधिकार और देनदारी बेच सकेगी, जिसे स्पेक्ट्रम की कमी महसूस हो रही है. ताजा मंजूरी सिर्फ 2010 की नीलामी वाले स्पेक्ट्रम के लिए है और स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रभावी तिथि के दो साल तक खरीद-बिक्री पर रोक है. इसके तहत संबंधित कंपनियों को सिर्फ 45 दिन पहले इसकी सूचना एक हलफनामे के साथ देनी होगी.
स्पेक्ट्रम की खरीद-बिक्री से आवंटित स्पेक्ट्रम की मूल वैधता अवधि में कोई बदलाव नहीं होगा. नियमों के मुताबिक, “स्पेक्ट्रम बेचने से पहले विक्रेता कंपनी को सभी बकायों का भुगतान करना होगा. उसके बाद किसी भी देनदारी का भुगतान खरीदार करेगा.
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