दिल्ली सरकार ने 8 सितंबर 2015 को सभी होटलों और रेस्टोरेंट को खाद्य सुरक्षा कानून के तहत लाइसेंस लेना अनिवार्य कर दिया.
लाइसेंस न लेने वाले रेस्तरां व होटल मालिकों को पांच लाख रूपए का जुर्माना देना होगा अथवा उसे छह महीने सज़ा अथवा दोनों हो सकते हैं. एक्ट के सेक्शन 31 (1) के तहत साफ तौर पर कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति बगैर लाइसेंस के खाद्य पदार्थों का कारोबार नहीं कर सकता है.
फ़ूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट 2006 दिल्ली में नौ वर्ष पहले लागू किया गया था लेकिन सरकारी आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में अब तक 19780 होटल और रेस्टोरेंट मालिकों ने लाइसेंस नहीं लिया है.
स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन और दिल्ली की खाद्य सुरक्षा विभाग की नवनियुक्त आयुक्त डॉ. मृणालिनी दर्शवाल के साथ हुई बैठक के बाद यह फैसला लिया गया.
लाइसेंस न लेने वाले रेस्तरां व होटल मालिकों को पांच लाख रूपए का जुर्माना देना होगा अथवा उसे छह महीने सज़ा अथवा दोनों हो सकते हैं. एक्ट के सेक्शन 31 (1) के तहत साफ तौर पर कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति बगैर लाइसेंस के खाद्य पदार्थों का कारोबार नहीं कर सकता है.
फ़ूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट 2006 दिल्ली में नौ वर्ष पहले लागू किया गया था लेकिन सरकारी आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में अब तक 19780 होटल और रेस्टोरेंट मालिकों ने लाइसेंस नहीं लिया है.
स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन और दिल्ली की खाद्य सुरक्षा विभाग की नवनियुक्त आयुक्त डॉ. मृणालिनी दर्शवाल के साथ हुई बैठक के बाद यह फैसला लिया गया.
स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार दिल्ली सरकार खाद्य पदार्थों के मामले में कोई सहनशीलता नहीं अपनाएगी तथा लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी.
दिल्ली सरकार ने इस बाबत होटल मालिकों को एक माह का समय दिया है तथा अक्टूबर 2015 से निर्देशों की अवहेलना करने वाले से कठोर दंड वसूला जाएगा.
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