भारतीय प्राणि सर्वेक्षण संस्थान ने स्थापना के 100वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में सुंदरवन की वनस्पतियों और जीवों पर जलवायु
परिवर्तन के प्रभाव का अध्ययन करने के लिए सदाबहार वनों के अंदर कई निगरानी अड्डों
की स्थापना की है.
मैंग्रोव, केकड़ों और घोंघे की विविधता और जनसंख्या सूचकांक को मापने के लिए बाली, गोसाबा, बसंती, सागर और सातजेलिया द्वीपों में केंद्र स्थापित कीरए गए हैं.
परियोजना के प्रभारी वैज्ञानिक बुल्गानिन मित्रा ने बताया कि उनकी जनसंख्या में कोई परिवर्तन इन द्वीपों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को प्रकट करेगा.
अध्ययन प्रक्रिया के अंतर्गत आंकड़े एकत्रित करने के लिए विशेषज्ञों को इन केन्द्रों पर भेजा जाएगा इसके अतिरिक्त जैव विविधता का अध्ययन करने के लिए विभिन्न स्थानों पर जीपीएस तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाएगा.
मैंग्रोव, केकड़ों और घोंघे की विविधता और जनसंख्या सूचकांक को मापने के लिए बाली, गोसाबा, बसंती, सागर और सातजेलिया द्वीपों में केंद्र स्थापित कीरए गए हैं.
परियोजना के प्रभारी वैज्ञानिक बुल्गानिन मित्रा ने बताया कि उनकी जनसंख्या में कोई परिवर्तन इन द्वीपों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को प्रकट करेगा.
अध्ययन प्रक्रिया के अंतर्गत आंकड़े एकत्रित करने के लिए विशेषज्ञों को इन केन्द्रों पर भेजा जाएगा इसके अतिरिक्त जैव विविधता का अध्ययन करने के लिए विभिन्न स्थानों पर जीपीएस तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाएगा.
निगरानी क्षेत्रों को अब तक सदाबहार वन के बफर जोन में स्थापित किया गया है और टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र के अंदर ऐसे केन्द्र स्थापित करने के लिए राज्य के वन विभाग से अनुमति भी प्राप्त कर ली गई है.
विदित हो सुंदरवन सौ से अधिक द्वीपों का एक द्वीपसमूह है जो यूनेस्को द्वारा विश्व विरासत स्थल के रूप में घोषित है. जो की रॉयल बंगाल टाइगर , गंगा और इरवादी डॉल्फिन जैसी कई लुप्तप्राय प्रजातियों के लिए प्रसिद्ध है.
भूमि अपरदन और बढ़ती लवणता के कारण इस द्वीप को भारी नुकसान हुआ है.
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