राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने 2 जुलाई 2015 को हरिद्वार और ऋषिकेश के तीर्थ स्थलों पर प्लास्टिक की थैलियों के प्रयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है.
इस आदेश का उल्लंघन करने पर 5000 रुपए का जुर्माना तय किया गया है.
यह निर्णय राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा पर्यावरणविद् एमसी मेहता की ओर से गंगा नदी में प्रदूषण के खिलाफ दायर की गई याचिका के फैसले में लिया गया.
अधिकरण द्वारा दिए गए आदेश के तहत इन दो जिलों में विशेष रूप से नदी के किनारों पर प्लास्टिक को पूर्ण रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया है.
आदेश के तहत प्लास्टिक का खाद्य, पैकिंग और अन्य किसी भी जगह इस्तेमाल नहीं किया जाएगा.
इसके अलावा अधिकरण ने हरिद्वार नगर निगम, पुलिस और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को मैदानों और गंगा के घाट पर निगरानी के निर्देश दिए हैं. इसके अतिरिक्त अधिकरण ने यह निर्देश भी दिए हैं की दुकानदारों द्वारा किसी भी तरह की कोई वस्तु प्लास्टिक की थैलियों में नहीं बेची जाएगी और नगरपालिका को यह सुनिश्चित करना होगा की किसी भी तरह के ठोस अपशिष्ट या पशु अपशिष्ट को घाट पर ना फेका जाए.
अधिकरण ने निगम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पुलिस से एक सप्ताह के भीतर दुकानों के पास उचित आकार के कचरे के डिब्बों की व्यवस्था करने के दिशा निर्देश भी जारी किए हैं.
अब इन जिलों के लोगों के लिए दैनिक आधार पर कूड़ा कचरे के डिब्बे में फेकना अनिवार्य होगा और एकत्रित किए गए इस कूड़े का निष्पादन एमएसडब्ल्यू,2000 के नियमों के तहत किया जाएगा.
पीठ ने राज्य की एजेंसियों को वैज्ञानिक तरीके से कचरे के भंडारण के लिए उपयुक्त साइट के निर्माण की जिम्मदारी दी.
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