भारत और थाईलैंड ने पांच करारों / समझौता ज्ञापनों (Memorandum
of Understandings, MOUs) पर बैकाक में 29 जून
2015 को हस्ताक्षर किए. यह हस्ताक्षर भारत-थाईलैंड संयुक्त
आयोग की 7वीं बैठक के दौरान किया गया.
इन करारों / समझौता ज्ञापनों पर भारत की विदेशमंत्री सुषमा स्वराज
तथा थाईलैंड के उप-प्रधानमंत्री और विदेशमंत्री जेन तानसाक ने हस्ताक्षर किये.
विदेशमंत्री सुषमा स्वराज ‘द्विपक्षीय सहयोग के लिए भारत-थाईलैंड संयुक्त आयोग’ की सातवीं बैठक में भाग लने के लिए अपनी तीन दिवसीय (27-29 जून 2015) थाईलैंड की यात्रा पर थी. इस दौरान यात्रा के अंतिम दिन बैठक की सहअध्यक्षता भी की.
हस्ताक्षरित करारों / समझौता ज्ञापनों की सूची
द्विपक्षीय सहयोग के लिए भारत – थाइलैंड संयुक्त आयोग की सातवीं बैठक के सहमत कार्यवृत्त: मंत्री स्तर पर द्विपक्षीय संबंध की समीक्षा के दौरान लिए गए निर्णयों का रिकार्ड.
प्रत्यर्पण संधि की पुष्टि से संबंधित कागजातों के आदान – प्रदान की मौखिक प्रक्रिया:इस संधि में भगोड़े अपराधियों के प्रत्यर्पण की मांग करने के लिए कानूनी रूपरेखा का प्रावधान है, जिसमें आतंकवाद, राष्ट्रपारीय अपराधों, आर्थिक अपराधों में शामिल भगोड़े अपराधी शामिल हैं. यह संधि ऐसे किसी व्यक्ति के प्रत्यर्पण के लिए प्रावधान करती है जो एक संविदाकारी राज्य द्वारा ट्रायल के लिए या सजा देने के लिए या सजा के प्रवर्तन के लिए वांटेड है तथा दूसरे संविदाकारी राज्य के भूभाग में पाया जाता है. यह भगोड़ों के तेजी से प्रत्यर्पण में दोनों देशों की मदद करेगी. यह संधि उनके द्विपक्षीय सहयोग के लिए एक मजबूत कानूनी आधार प्रदान करके दोनों देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच संबंध को और सुदृढ़ करेगी
नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना पर समझौता ज्ञापन: इस करार पर हस्ताक्षर करके थाइलैंड नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना में पूर्वी एशिया बैठक (ईएएस) के अन्य देशों में शामिल हो गया है.
आय पर करों के संबंध में दोहरे कराधान के परिहार और राजकोषीय अपवंचन की रोकथाम के लिए भारत और थाइलैंड के बीच करार: यह करार आय पर करों के संबंध में दोहरे कराधान से बचने तथा राजकोषीय अपवंचन पर रोकथाम लगाने के लिए रूपरेखा प्रदान करता है ताकि दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को बढ़ावा दिया जा सके.
आयुर्वेद में शैक्षिक पीठ की स्थापना पर समझौता ज्ञापन: केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान संस्थान परिषद आयुर्वेद में शैक्षिक एवं अनुसंधान की गतिविधियां संपन्न करने के लिए रंगसित विश्वविद्यलाय, थाइलैंड में एक पीठ की स्थापना करेगी.
विदेशमंत्री सुषमा स्वराज ‘द्विपक्षीय सहयोग के लिए भारत-थाईलैंड संयुक्त आयोग’ की सातवीं बैठक में भाग लने के लिए अपनी तीन दिवसीय (27-29 जून 2015) थाईलैंड की यात्रा पर थी. इस दौरान यात्रा के अंतिम दिन बैठक की सहअध्यक्षता भी की.
हस्ताक्षरित करारों / समझौता ज्ञापनों की सूची
द्विपक्षीय सहयोग के लिए भारत – थाइलैंड संयुक्त आयोग की सातवीं बैठक के सहमत कार्यवृत्त: मंत्री स्तर पर द्विपक्षीय संबंध की समीक्षा के दौरान लिए गए निर्णयों का रिकार्ड.
प्रत्यर्पण संधि की पुष्टि से संबंधित कागजातों के आदान – प्रदान की मौखिक प्रक्रिया:इस संधि में भगोड़े अपराधियों के प्रत्यर्पण की मांग करने के लिए कानूनी रूपरेखा का प्रावधान है, जिसमें आतंकवाद, राष्ट्रपारीय अपराधों, आर्थिक अपराधों में शामिल भगोड़े अपराधी शामिल हैं. यह संधि ऐसे किसी व्यक्ति के प्रत्यर्पण के लिए प्रावधान करती है जो एक संविदाकारी राज्य द्वारा ट्रायल के लिए या सजा देने के लिए या सजा के प्रवर्तन के लिए वांटेड है तथा दूसरे संविदाकारी राज्य के भूभाग में पाया जाता है. यह भगोड़ों के तेजी से प्रत्यर्पण में दोनों देशों की मदद करेगी. यह संधि उनके द्विपक्षीय सहयोग के लिए एक मजबूत कानूनी आधार प्रदान करके दोनों देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच संबंध को और सुदृढ़ करेगी
नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना पर समझौता ज्ञापन: इस करार पर हस्ताक्षर करके थाइलैंड नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना में पूर्वी एशिया बैठक (ईएएस) के अन्य देशों में शामिल हो गया है.
आय पर करों के संबंध में दोहरे कराधान के परिहार और राजकोषीय अपवंचन की रोकथाम के लिए भारत और थाइलैंड के बीच करार: यह करार आय पर करों के संबंध में दोहरे कराधान से बचने तथा राजकोषीय अपवंचन पर रोकथाम लगाने के लिए रूपरेखा प्रदान करता है ताकि दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को बढ़ावा दिया जा सके.
आयुर्वेद में शैक्षिक पीठ की स्थापना पर समझौता ज्ञापन: केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान संस्थान परिषद आयुर्वेद में शैक्षिक एवं अनुसंधान की गतिविधियां संपन्न करने के लिए रंगसित विश्वविद्यलाय, थाइलैंड में एक पीठ की स्थापना करेगी.
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