प्रख्यात तेलगु लेखक दशरधि रंगाचार्य का 8 जून 2015 को लम्बी बीमारी से जूझने के बाद हैदराबाद
में निधन हो गया. वे 87 वर्ष के थे.
रंगाचार्य का जन्म 24 अगस्त 1928 को तेलंगाना के जिले खम्मम में हुआ, उन्होंने निज़ाम के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह में भाग लिया था.
वे मार्क्सवाद तथा समाजवाद से प्रभावित थे. उन्होंने साधारण लोगों, विशेषकर तेलंगाना प्रदेश, से जुड़ी दिक्कतों तथा रोज़मर्रा के जीवन को अपने उपन्यासों के माध्यम से दर्शाया.
रंगाचार्य का जन्म 24 अगस्त 1928 को तेलंगाना के जिले खम्मम में हुआ, उन्होंने निज़ाम के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह में भाग लिया था.
वे मार्क्सवाद तथा समाजवाद से प्रभावित थे. उन्होंने साधारण लोगों, विशेषकर तेलंगाना प्रदेश, से जुड़ी दिक्कतों तथा रोज़मर्रा के जीवन को अपने उपन्यासों के माध्यम से दर्शाया.
उनके उपन्यास मोदुगा पूलू (अग्नि पुष्प), चिल्लारा देवुलू (कमज़ोर देवता) तथा जनपदम् उनकी प्रमुख रचनाएं हैं जिनसे प्रभावित होकर तेलगु लोगों ने शासकों के खिलाफ विद्रोह किया था.
उनके द्वारा लिखे गए चिल्लारा देवुलू के लिए उन्हें वर्ष 1969 में केंद्रीय साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया.
उन्होंने रामायण तथा महाभारत के अतिरिक्त सभी चार वेदों का तेलुगु में अनुवाद किया. उन्होंने जीवनायनम शीर्षक से अपनी जीवनी भी लिखी.
तेलुगु में उनकी अन्य प्रसिद्ध रचनाएं हैं श्रीमदरामायणम तथा श्रीमदमहाभारतम.
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