आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) ने 6 नवंबर 2014 को आर्थिक आउटलुक 2014 जारी की. आर्थिक आउटलुक 2014 के अनुसार वैश्विक
जीडीपी विकास का वर्ष 2016 में 3.9 प्रतिशत
और वर्ष 2015 में 3.7 प्रतिशत की तेजी
प्राप्त करने से पहले वर्ष 2014 में 3.3 प्रतिशत दर पर पहुंचने का अनुमान है.
पूर्व– संकट अवधि की तुलना की जाए तो
वैश्विक विकास दर मामूली है. यह पूर्वानुमान सितंबर 2014 में किए गए पूर्वानुमान से थोड़ा कम है.
आर्थिक आउटलुक 2014 के मुख्य तथ्य
• वैश्विक अर्थव्यवस्था के मंद स्थित में रहने की संभावना है लेकिन यह धीरे– धीरे तेज हो सकता है यदि दुनिया के देश विकास– समर्थन नीतियों को लागू करते हैं. इसके अलावा, देशों और इलाकों के बीच चौड़ी होती खाई प्रमुख जोखिम हैं.
• वित्तीय जोखिम उच्च बना रहेगा और भविष्य में बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है और यूरो क्षेत्र में विकासहीनता के जोखिम के बढ़ने की संभावना है. देशों को इन जोखिम और समर्थन विकास से निपटने के लिए सभी प्रकार के मौद्रिक, वित्तीय और संरचनात्मक सुधार नीतियों को लागू करना चाहिए.
विकसित अर्थव्यवस्थाओं में विकास
• प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में संयुक्त राज्य अमेरिका की रिकवरी मजबूत बनी हुई है, वर्ष 2014 में इसके 2.2 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है. वर्ष 2015 और 2016 में यह करीब 3 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है.
• यूरो जोन के विकास में धीरे– धीरे तेजी आने की उम्मीद है. यह वर्ष 2014 में 0.8 प्रतिशत से 2015 में 1.1 प्रतिशत और 2016 में 1.7 प्रतिशत होने संभावना है.
• जापान का विकास वर्ष 2014 में 0.9 प्रतिशत, 2015 में 1.1 प्रतिशत और 2016 में 0.8 प्रतिशत की दर से होने का अनुमान है और विकास खपत कर वृद्धि से प्रभावित होना जारी रहेगा.
ब्रिक्स (BRIC) देशों में विकास
• ब्राजील का विकास कम होगा. इसकी अर्थव्यवस्या वर्ष 2014 में मात्र 0.3 प्रतिशत, 2015 में 1.5 प्रतिशत और 2016 में 2 प्रतिशत की दर से विकास करेगी.
• रूस की अर्थव्यवस्था तेल की कम कीमतों और कमजोर व्यापार की वजह से 2014 में सिर्फ 0.7 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी और 2016 में 2 प्रतिशत की विकास दर हासिल करने से पहले 2015 में इसके विकास दर के शून्य होने की संभावना है.
• वर्ष 2014 में बढ़ते निवेश के कारण भारत का विकास दर 5.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, 2015 में इसके 6.4 प्रतिशत और 2016 में 6.6 प्रतिशत होने का अनुमान किया गया है.
• वित्तवर्ष 2015– 16 में चीन का विकास 7 प्रतिशत की दर से होना अनुमानित है, जो कि 2014 के 7.4 प्रतिशत से थोड़ा सा कम है. अधिक स्थायी विकास दर के लिए नियंत्रित मंदी की स्थिति प्राप्त करने की कोशिश में यह अपनी अर्थव्यवस्था का पुनर्संतुलन है.
वैश्विक अर्थव्यवस्था के जोखिम का नकारात्मक पक्ष
• यूरो इलाके में मांग की कमी की वजह से महत्वपूर्ण जोखिम के नकारात्मक पक्ष और प्रमुख चिंताएं हैं, जो कि दीर्धकालिक स्थिरता और कम मुद्रास्फीति की तरफ इशारा करता है.
• अमेरिका की कठोर मौद्रिक नीति उभरते बाजार अर्थव्यवस्थाओं के लिए वित्तीय बाजार की अस्थिरता पैदा कर सकती है.
• कुछ उन्नत और उभरती अर्थव्यवस्ताओं में उच्च ऋण स्तर भी वित्तीय स्थिरता संबंधी चिंताएं पैदा कर सकते हैं.
• एक प्रमुख जोखिम संभावित उत्पादन वृद्धि में मंदी है जो अनुमान की तुलना में कमजोर विकास ट्रेंड की ओर जाता है.
आर्थिक आउटलुक 2014 के मुख्य तथ्य
• वैश्विक अर्थव्यवस्था के मंद स्थित में रहने की संभावना है लेकिन यह धीरे– धीरे तेज हो सकता है यदि दुनिया के देश विकास– समर्थन नीतियों को लागू करते हैं. इसके अलावा, देशों और इलाकों के बीच चौड़ी होती खाई प्रमुख जोखिम हैं.
• वित्तीय जोखिम उच्च बना रहेगा और भविष्य में बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है और यूरो क्षेत्र में विकासहीनता के जोखिम के बढ़ने की संभावना है. देशों को इन जोखिम और समर्थन विकास से निपटने के लिए सभी प्रकार के मौद्रिक, वित्तीय और संरचनात्मक सुधार नीतियों को लागू करना चाहिए.
विकसित अर्थव्यवस्थाओं में विकास
• प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में संयुक्त राज्य अमेरिका की रिकवरी मजबूत बनी हुई है, वर्ष 2014 में इसके 2.2 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है. वर्ष 2015 और 2016 में यह करीब 3 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है.
• यूरो जोन के विकास में धीरे– धीरे तेजी आने की उम्मीद है. यह वर्ष 2014 में 0.8 प्रतिशत से 2015 में 1.1 प्रतिशत और 2016 में 1.7 प्रतिशत होने संभावना है.
• जापान का विकास वर्ष 2014 में 0.9 प्रतिशत, 2015 में 1.1 प्रतिशत और 2016 में 0.8 प्रतिशत की दर से होने का अनुमान है और विकास खपत कर वृद्धि से प्रभावित होना जारी रहेगा.
ब्रिक्स (BRIC) देशों में विकास
• ब्राजील का विकास कम होगा. इसकी अर्थव्यवस्या वर्ष 2014 में मात्र 0.3 प्रतिशत, 2015 में 1.5 प्रतिशत और 2016 में 2 प्रतिशत की दर से विकास करेगी.
• रूस की अर्थव्यवस्था तेल की कम कीमतों और कमजोर व्यापार की वजह से 2014 में सिर्फ 0.7 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी और 2016 में 2 प्रतिशत की विकास दर हासिल करने से पहले 2015 में इसके विकास दर के शून्य होने की संभावना है.
• वर्ष 2014 में बढ़ते निवेश के कारण भारत का विकास दर 5.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, 2015 में इसके 6.4 प्रतिशत और 2016 में 6.6 प्रतिशत होने का अनुमान किया गया है.
• वित्तवर्ष 2015– 16 में चीन का विकास 7 प्रतिशत की दर से होना अनुमानित है, जो कि 2014 के 7.4 प्रतिशत से थोड़ा सा कम है. अधिक स्थायी विकास दर के लिए नियंत्रित मंदी की स्थिति प्राप्त करने की कोशिश में यह अपनी अर्थव्यवस्था का पुनर्संतुलन है.
वैश्विक अर्थव्यवस्था के जोखिम का नकारात्मक पक्ष
• यूरो इलाके में मांग की कमी की वजह से महत्वपूर्ण जोखिम के नकारात्मक पक्ष और प्रमुख चिंताएं हैं, जो कि दीर्धकालिक स्थिरता और कम मुद्रास्फीति की तरफ इशारा करता है.
• अमेरिका की कठोर मौद्रिक नीति उभरते बाजार अर्थव्यवस्थाओं के लिए वित्तीय बाजार की अस्थिरता पैदा कर सकती है.
• कुछ उन्नत और उभरती अर्थव्यवस्ताओं में उच्च ऋण स्तर भी वित्तीय स्थिरता संबंधी चिंताएं पैदा कर सकते हैं.
• एक प्रमुख जोखिम संभावित उत्पादन वृद्धि में मंदी है जो अनुमान की तुलना में कमजोर विकास ट्रेंड की ओर जाता है.
आर्थिक आउटलुक 2014 की
सिफारिशें
• मौद्रिक नीति को अभी भी सभी प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं में मांग का समर्थन करने की जरूरत है विशेषकर संयुक्त राज्य अमेरिका में, सतत विकास और कठोर श्रम बाजारों में वर्ष 2015 से नीतिगत दरों को बढ़ाने की अनुमति मिलनी चाहिए.
• बैंक ऑफ जापान को मात्रात्मक सहजता तब तक जारी रखनी चाहिए जब तक कि मुद्रास्फिति लक्ष्य हासिल न हो जाए. साथ ही जापान में राजकोषीय समेकन तेजी से आगे बढ़ना चाहिए.
• यूरो जोन क्षेत्र मुद्रास्फीति लक्ष्य से बहुत दूर है और नीचे की ओर जा रहा है इसिलए यूरोपीयन सेंट्रल बैंक को अपनी मौद्रिक नीति में विस्तार करना चाहिए.
• उन्नत और विकासशील देशों मेंमहत्वाकांक्षी ढांचागत सुधार जो कि पूरक माइक्रोइकोनॉमिक नीतियां को बढ़ावा दे सकते हैं, अलग– अलग हैं. इन मुद्दों पर गौर करने के लिए G-20 देशों ने ब्रिसबेन शिखर सम्मेलन में राष्ट्रीय विकास रणनीति देना तय किया था जो कि सामूहिक रूप से G20 देशों के सकल घरेलू उत्पाद को 2013 के स्तर की तुलना में 2018 तक 2 प्रतिशत की दर से बढ़ाएगा.
• कर, व्यापार, श्रम और उत्पाद बाजारों में सुधार घरेलू निवेश और वैश्विक बाजार को लाभ पहुंचा सकेंगे और अधिक रोजगार एवं विश्व में खपत को बढ़ावा देंगे.
• विचाराधीन संरचनात्मक सुधार एजेंडे से संभावित लाभ जबरदस्त हैं, लेकिन देशों को उन उपायों को लागू करना होगा जिन्हें वैश्विक अर्थव्यवस्था को उच्च गियर में ले जाने के लिए माना गया है.
• मौद्रिक नीति को अभी भी सभी प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं में मांग का समर्थन करने की जरूरत है विशेषकर संयुक्त राज्य अमेरिका में, सतत विकास और कठोर श्रम बाजारों में वर्ष 2015 से नीतिगत दरों को बढ़ाने की अनुमति मिलनी चाहिए.
• बैंक ऑफ जापान को मात्रात्मक सहजता तब तक जारी रखनी चाहिए जब तक कि मुद्रास्फिति लक्ष्य हासिल न हो जाए. साथ ही जापान में राजकोषीय समेकन तेजी से आगे बढ़ना चाहिए.
• यूरो जोन क्षेत्र मुद्रास्फीति लक्ष्य से बहुत दूर है और नीचे की ओर जा रहा है इसिलए यूरोपीयन सेंट्रल बैंक को अपनी मौद्रिक नीति में विस्तार करना चाहिए.
• उन्नत और विकासशील देशों मेंमहत्वाकांक्षी ढांचागत सुधार जो कि पूरक माइक्रोइकोनॉमिक नीतियां को बढ़ावा दे सकते हैं, अलग– अलग हैं. इन मुद्दों पर गौर करने के लिए G-20 देशों ने ब्रिसबेन शिखर सम्मेलन में राष्ट्रीय विकास रणनीति देना तय किया था जो कि सामूहिक रूप से G20 देशों के सकल घरेलू उत्पाद को 2013 के स्तर की तुलना में 2018 तक 2 प्रतिशत की दर से बढ़ाएगा.
• कर, व्यापार, श्रम और उत्पाद बाजारों में सुधार घरेलू निवेश और वैश्विक बाजार को लाभ पहुंचा सकेंगे और अधिक रोजगार एवं विश्व में खपत को बढ़ावा देंगे.
• विचाराधीन संरचनात्मक सुधार एजेंडे से संभावित लाभ जबरदस्त हैं, लेकिन देशों को उन उपायों को लागू करना होगा जिन्हें वैश्विक अर्थव्यवस्था को उच्च गियर में ले जाने के लिए माना गया है.
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