केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री पुषापति अशोक गणपति राजू ने 9 सितंबर 2014 को पांच शहरों में ‘नो–फ्रिल्स’ हवाई अड्डों (कम लागत वाले मॉडल हवाई अड्डे) के निर्माण की घोषणा की. ये जगह हैं- अरुणाचल प्रदेश में तेजु, राजस्थान में किशनगढ़, ओडीशा में झारसुगुड़ा, हुबली और कर्नाटक में बेलगाम. नो–फ्रिल्स हवाईअड्डों का विकास क्षेत्रीय और सुदूर इलाकों के बीच पर्यटन एवं अन्य आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के एवं यातायात संपर्क बढ़ाने के लिए विकसित किया जाएगा.
नो–फ्रिल्स हवाईअड्डे, अपनी तरह के नए हवाईअड्डे होंगे और पचास करोड़ रुपयों की आरंभिक लागत से बनाए जाएंगे. इनमें बैठने, लाउंज और हवाई यातायात प्रबंधन की सीमित सेवा उपलब्द होगी.
नो–फ्रिल्स हवाईअड्डों की मुख्य विशेषताएं
नो–फ्रिल्स हवाईअड्डों की मुख्य विशेषताएं
• इन हवाई अड्डों पर क्यू–400 और एटीआर जैसे टर्बोप्रॉप को संभालने के लिए पर्याप्त लंबी हवाईपट्टी होगी.
• साधारण संरचना के साथ टर्मिनल एक ही मंजिल का होगा.
• इन हवाई अड्डों पर बड़े एटीसी टावरों की जगह मोबाइल हवाई यातायात नियंत्रण इकाईयां होंगीं.
• इन हवाईअड्डों पर कनवेयर बेल्ट या एयरोब्रिज नहीं होंगे.
विदित हो कि पूर्व में नो–फ्रिल्स हवाईअड्डों के निर्माण की योजना भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) ने बनाई थी, लेकिन इस योजना के पूरा किए जाने का समय नहीं बताया गया था. लेकिन नरेन्द्र मोदी नीत नई सरकार के निर्देशों के मुताबिक, मंत्रालय ने इस वित्त वर्ष के आखिर तक कम–से–कम पांच नो–फ्रिल्स हवाई अड्डों के विकास के लिए योजना तैयार करने को कहा है. इसके अलावा, ऐसे पचास हवाईअड्डे बनाए जाएंगे.
• साधारण संरचना के साथ टर्मिनल एक ही मंजिल का होगा.
• इन हवाई अड्डों पर बड़े एटीसी टावरों की जगह मोबाइल हवाई यातायात नियंत्रण इकाईयां होंगीं.
• इन हवाईअड्डों पर कनवेयर बेल्ट या एयरोब्रिज नहीं होंगे.
विदित हो कि पूर्व में नो–फ्रिल्स हवाईअड्डों के निर्माण की योजना भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) ने बनाई थी, लेकिन इस योजना के पूरा किए जाने का समय नहीं बताया गया था. लेकिन नरेन्द्र मोदी नीत नई सरकार के निर्देशों के मुताबिक, मंत्रालय ने इस वित्त वर्ष के आखिर तक कम–से–कम पांच नो–फ्रिल्स हवाई अड्डों के विकास के लिए योजना तैयार करने को कहा है. इसके अलावा, ऐसे पचास हवाईअड्डे बनाए जाएंगे.
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