भारतीय रिजर्व बैंक ने व्यापार और भुगतान संतुलन की शेष राशि के आंकड़े जारी किए-(06-SEP-2014) C.A

| Saturday, September 6, 2014
भारतीय रिजर्व बैंक ने व्यापार और भुगतान संतुलन की शेष राशि (बैलेंस ऑफ ट्रेड एंड बैलेंस ऑफ पेमेंट्स) के आंकड़े 1 सितंबर 2014 को जारी किए.
बैलेंस ऑफ ट्रेड डाटा के मुताबिक, भारत का चालू खाते का घाटा (सीएडी) वित्त वर्ष 2013– 14 की पहली तिमाही के 4.8 फीसदी की तुलना में वित्त वर्ष 2014–15 की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद का सिर्फ 1.7 फीसदी रहा. पहली तिमाही अप्रैलजून की अवधि होती है.
ऐब्सलूट (शुद्ध) संदर्भ में 2013–14 की पहली तिमाही में 21.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर की तुलना मंं 2014–15 की पहली तिमाही में सीएडी 7.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर था. 
हालांकि, वर्ष 2013–14 की चौथी तिमाही में सीएडी जीडीपी से 0.2 फीसदी (1.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर) अधिक था. 

सीएडी के कम होने के कारण
वर्ष 2014–15 की पहली तिमाही में सीएडी के कम होने की मुख्य वजह व्यापार घाटे में कमी (निर्यात में बढ़ोतरी और आयात में कमी की वजह से) और सोने के आयात में भारी गिरावट रही.
आयात में कमी मुख्य रुप से सोने के आयात में हुई 57.2 फीसदी की भारी गिरावट, जो कि वर्ष 2013–14 के अप्रैलजून तिमाही के 16.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बहुत कम था.
व्यापार घाटा जो कि वर्ष 2013–14 की पहली तिमाही में 50.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर का था, वहीं वर्ष 2014–15 की पहली तिमाही में 31.4 फीसदी कम होकर, 34.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर रह गया.
वर्ष 2014–15 की पहली तिमाही में निर्याक में 10.6 फीसदी की बढ़ोतरी हुआ और यह 81.7 मिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया. आयात में 6.4 फीसदी की कमी हुई और यह 116.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर का रहा.
वित्त वर्ष 2012–13 में सोने के आयात में हुई जबरदस्त बढ़ोतरी के कारण सीएडी 87.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर(4.8 फीसदी) की रिकॉर्ड उंचाई पर पहुंच गया था. सरकार के कीमती धातु पर आयात प्रतिबंध लगाने के बाद वित्त वर्ष 2013–14 में सीएडी 32.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर (1.7 फीसदी) पर आ गया.
बैलेंस पेमेंट्स पर आरबीआई के आंकड़े
1 सितंबर 2014 को जारी किए गए बैलेंस ऑफ पेमेंट्स (बीओपी) आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2014–15 की पहली तिमाही में शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और शुद्ध पोर्टफोलियो निवेश प्रवाह दर्ज किए गए.
पोर्टफोलियो निवेश में 12.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर का शुद्ध प्रवाह दर्ज किया गया है, 8.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर का  शुद्ध एफडीआई प्रवाह काफी अधिक था.
वर्ष 2013–14 की पहली तिमाही में 5.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर के शुद्ध एनआऱआई जमा की तुलना में वर्ष 2014–15 की पहली तिमाही में एनआरआई जमा 2.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर का रहा.
यह लगातार तीसरी तिमाही है जिसमें विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी दर्ज की गई है जिसका अर्थ है बीओपी स्थिति में सुधार.


0 comments:

Post a Comment