भारतीय गणितज्ञ निखिल श्रीवास्तव ने अमेरिका में वर्ष 2014
का प्रतिष्ठित ‘जॉर्ज पोल्या’ (George
Polya Prize) पुरस्कार जीता. वे इस पुरस्कार के संयुक्त विजेता बने.
उन्हें गणित के एक जटिल सवाल को सुलझाने हेतु यह पुरस्कार दिया गया. इस पुरस्कार
की घोषणा जुलाई 2014 के दुसरे सप्ताह में की गई.
निखिल श्रीवास्तव एडम डब्ल्यू. मार्कस और डेनियल ए. स्पीलमैन के साथ
उस तीन सदस्यीय गणितज्ञ टीम के सदस्य थे, जिसने
गणित के एक जटिल सवाल ‘केडिसन-सिंगर कंजेक्टर’ का हल निकालने में सफलता हासिल की. इस सवाल को लेकर करीब आधी सदी से
गणितज्ञ परेशान थे. ‘कैडिसन-सिंगर कंजेक्टर’ को सबसे पहले वर्ष 1959 में ‘रिचर्ड
कैडिसन’ और ‘इसाडोर सिंगर’ ने प्रस्तुत किया था.
‘जॉर्ज पोल्या’ (George Polya Prize) पुरस्कार से संबंधित मुख्य तथ्य
‘जॉर्ज पोल्या’ (George Polya Prize) पुरस्कार गणित में सन्निकटन सिद्धांत, जटिल विश्लेषण, संख्या सिद्धांत, संभाव्यता सिद्धांत इत्यादि के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान हेतु प्रति दो वर्ष के अन्तराल पर अमेरिका के ‘सोसाइटी फॉर इंडस्ट्रियल एंड एप्लाइड मैथमेटिक्स’(Society for Industrial and Applied Mathematics) द्वारा दिया जाता है. इस पुरस्कार की शुरुआत वर्ष 1969 में गणितज्ञ जॉर्ज पोल्या के नाम पर की गई.
विदित हो कि निखिल श्रीवास्तव ने अमेरिका के येल विश्वविद्यालय से गणित में पीएचडी की डिग्री हासिल की है एवं वर्तमान में वे बेंगलूर स्थित माइक्रोसॉफ्ट रिसर्च इंडिया से जुड़े हैं.
‘जॉर्ज पोल्या’ (George Polya Prize) पुरस्कार से संबंधित मुख्य तथ्य
‘जॉर्ज पोल्या’ (George Polya Prize) पुरस्कार गणित में सन्निकटन सिद्धांत, जटिल विश्लेषण, संख्या सिद्धांत, संभाव्यता सिद्धांत इत्यादि के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान हेतु प्रति दो वर्ष के अन्तराल पर अमेरिका के ‘सोसाइटी फॉर इंडस्ट्रियल एंड एप्लाइड मैथमेटिक्स’(Society for Industrial and Applied Mathematics) द्वारा दिया जाता है. इस पुरस्कार की शुरुआत वर्ष 1969 में गणितज्ञ जॉर्ज पोल्या के नाम पर की गई.
विदित हो कि निखिल श्रीवास्तव ने अमेरिका के येल विश्वविद्यालय से गणित में पीएचडी की डिग्री हासिल की है एवं वर्तमान में वे बेंगलूर स्थित माइक्रोसॉफ्ट रिसर्च इंडिया से जुड़े हैं.
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