संयुक्त राष्ट्र के ‘सामुद्रिक
क़ानून’ पर बने अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण ने भारत और
बांग्लादेश समुद्री सीमा विवाद पर 8 जुलाई 2014 को अपना निर्णय दिया. इस निर्णय के तहत विवादित क्षेत्र का लगभग 80
प्रतिशत हिस्सा बांग्लादेश को देने का प्रावधान किया गया.
संयुक्त राष्ट्र न्यायाधिकरण के
फैसले के अनुसार, दोनों देशों के बीच विवाद में फंसे बंगाल
की खाड़ी के 25000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का 19500 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र बांग्लादेश को दिया गया एवं करीब 6000 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र भारत के हिस्से में आया.
संयुक्त राष्ट्र न्यायाधिकरण के फैसले के मुख्य बिंदू
• न्यायाधिकरण ने बांग्लादेश और भारत के बीच बंगाल की खाड़ी में समुद्री सीमारेखा खींच दी.
• बांग्लादेश को 7516 वर्गमील (19500 वर्ग किलोमीटर) समुद्री क्षेत्र दिया गया.
• 6000 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र भारत के हिस्से में आया.
• बांग्लादेश अब बंगाल की खाड़ी में तेल की खोज कर सकेगा.
पृष्ठभूमि
बांग्लादेश का वर्ष 1971 में एक स्वतंत्र देश के रूप में उदय के बाद से ही भारत एवं इसके बीच समुद्री सीमा विवाद की स्थिति लगातार बनी रही. इस समुद्री सीमा के विवाद को बांग्लादेश ने वर्ष 2009 में संयुक्त राष्ट्र के ‘सामुद्रिक क़ानून’ पर बने अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण में उठाया, जिसपर भारत ने भी अपनी सहमति दी.
विदित हो कि संयुक्त राष्ट्र न्यायाधिकरण के इस फैसले का भारत और बांग्लादेश दोनों ने ही स्वागत किया है.
संयुक्त राष्ट्र न्यायाधिकरण के फैसले के मुख्य बिंदू
• न्यायाधिकरण ने बांग्लादेश और भारत के बीच बंगाल की खाड़ी में समुद्री सीमारेखा खींच दी.
• बांग्लादेश को 7516 वर्गमील (19500 वर्ग किलोमीटर) समुद्री क्षेत्र दिया गया.
• 6000 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र भारत के हिस्से में आया.
• बांग्लादेश अब बंगाल की खाड़ी में तेल की खोज कर सकेगा.
पृष्ठभूमि
बांग्लादेश का वर्ष 1971 में एक स्वतंत्र देश के रूप में उदय के बाद से ही भारत एवं इसके बीच समुद्री सीमा विवाद की स्थिति लगातार बनी रही. इस समुद्री सीमा के विवाद को बांग्लादेश ने वर्ष 2009 में संयुक्त राष्ट्र के ‘सामुद्रिक क़ानून’ पर बने अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण में उठाया, जिसपर भारत ने भी अपनी सहमति दी.
विदित हो कि संयुक्त राष्ट्र न्यायाधिकरण के इस फैसले का भारत और बांग्लादेश दोनों ने ही स्वागत किया है.
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