विश्व बैंक ने 30 जून 2014 को दक्षिण एशिया में छात्र शिक्षा: चुनौतियां, अवसर
और नीति की प्राथमिकता शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की. रिपोर्ट के आधार शिक्षा की
खराब गुणवत्ता को भारत सहित दक्षिण एशिया के विकास में बाधा बताया गया.
शिक्षा की खराब गुणवत्ता सीखने के स्तर को प्रभावित करती है, आर्थिक विकास और साझा समृद्धि में अवरोध उत्पन्न करती है.
रिपोर्ट की मुख्य विशेषताएं
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दक्षिण एशिया में (अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत,
मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान
और श्रीलंका) जैसे कई देशों की सरकारों ने वर्ष 2015 तक
प्राथमिक शिक्षा के सहस्राब्दि विकास लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए शिक्षा के
क्षेत्र में भारी निवेश किया है.
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दक्षिण एशिया में निवेश बढ़ने के
नाते वर्ष 2000-2010 में प्राथमिक स्कूलों में शुद्ध
नामांकन दर में वृद्धि 75 प्रतिशत से बढ़कर 89 प्रतिशत हो गई. नामांकन दर में वृद्धि के
परिणामस्वरूप लैटिन अमेरिका और कैरेबियन में नामांकन
दर (94 प्रतिशत) और पूर्व एशिया और प्रशांत मे
(95 प्रतिशत) रही.
दक्षिण एशिया के देशों में स्कूली शिक्षा के साथ ही देश के भीतर विभिन्न सामाजिक आर्थिक और जनसांख्यिकीय समूहों के बीच में तीन बड़े मतभेद हैं. उदाहरण के लिए, श्रीलंका ने एक दशक पहले ही प्राथमिक शिक्षा मे सफलता हासिल की है. दूसरी ओर, अफगानिस्तान और पाकिस्तान में अभी भी अन्य दक्षिण एशियाई देशों के मुकाबले बहुत अंतराल है.
दक्षिण एशिया के देशों में स्कूली शिक्षा के साथ ही देश के भीतर विभिन्न सामाजिक आर्थिक और जनसांख्यिकीय समूहों के बीच में तीन बड़े मतभेद हैं. उदाहरण के लिए, श्रीलंका ने एक दशक पहले ही प्राथमिक शिक्षा मे सफलता हासिल की है. दूसरी ओर, अफगानिस्तान और पाकिस्तान में अभी भी अन्य दक्षिण एशियाई देशों के मुकाबले बहुत अंतराल है.
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दक्षिण एशिया की शिक्षा प्रणाली के
आधार पर अधिकांश छात्रों के निराशाजनक परिणामों से पता चला है की प्राथमिक स्कूलों
से पढ़कर निकलने वालों में एक चौथाई से एक तिहाई बच्चे ऐसे होते हैं जिन्हें
बुनियादी संख्यात्मक या साक्षरता कौशल के ज्ञान की कमी है, जो उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में और आगे बढ़ाएगा.
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शिक्षकों की गुणवत्ता बढ़ाने के साथ
रिपोर्ट ने भारत में किए गए सर्वे के हवाले से बताया कि जो पाठ्यक्रम पढ़ाने के
लिए शिक्षक नियुक्त हैं, उनके गणित व भाषा
से संबंधित टेस्ट में बहुत खराब प्रदर्शन किया है.
छोटे बच्चों के लिए पर्याप्त पोषण सुनिश्चित हो.
छोटे बच्चों के लिए पर्याप्त पोषण सुनिश्चित हो.
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सरकार को उचित कवरेज और प्रारंभिक जीवन में पोषण में निवेश करने की
जरूरत है. इससे गुणवत्ता और शिक्षा की दक्षता प्रभावी
होगी.
शिक्षक गुणवत्ता
दक्षिण एशिया में पाठ्यक्रम को पढ़ाने के लिए जिन शिक्षकों
को नियुक्त किया गया हैं, उन्हें यह बताना
चाहिए की उन्होने गणित व भाषा संबंधित टेस्ट में ही उन्होंने बहुत खराब प्रदर्शन
किया और उच्च व स्पष्ट मानक लागू होने के अलावा गैरहाजिरी रोकने व गैर-योग्यता
आधारित प्रोन्नति खत्म करने जैसे कदम उठाने जरूरी हैं.
गुणवत्ता को बढ़ावा देने के लिए
वित्तीय प्रोत्साहन का उपयोग
गुणवत्ता को बढ़ावा देने के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध
हैं. शिक्षकों को सुधार के लिए उच्च वेतन देने के बजाय कक्षा के आकार को कम करने
की जरूरत है जिससे छात्रों के प्रदर्शन को बढ़ावा मिलेगा.
निजी क्षेत्र में स्थानांतरण
निजी क्षेत्र पहले से ही शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रमुख
भूमिका निभा रहा है, और सरकार को सार्वजनिक निजी भागीदारी को
बढ़ावा देकर अधिक से अधिक निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करना चाहिए.
छात्र प्रगति में सुधार
सरकार को छात्रों के आकलन और अंतरराष्ट्रीय मानकों की
गुणवत्ता एवं विश्वसनीयता में सुधार करने की जरूरत है.
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