अगस्त 2013 को मुंबई के बंदरगाह पर भारतीय नौसेना
की पनडुब्बी आईएनएस सिंधुरक्षक एक दुर्घटना की वजह से डूब गई थी. इस हादसे में 18
नौ सैनिकों की मौत हो गई थी. 5 जून 2014
को इसे एक बचाव फर्म ने समुद्र से बाहर निकाला. इसे अमेरिकी कंपनी
रिजॉल्व मरीन की भारतीय शाखा ने बाहर निकाला और कुछ दिनों में इसे दक्षिण मुंबई के
नौसेना डॉकयार्ड पर ले आया जाएगा.
विशेष उपकरणों की मदद से बाहर लाए गए इस पनडुब्बी का विशेषज्ञ बारीकी से जांच करेंगें औऱ इसमें लगने वाली आग और विस्फोट की कारणों का पता लगाएंगे जिसकी वजह से अरब सागर में डूब गई थी.
विशेष उपकरणों की मदद से बाहर लाए गए इस पनडुब्बी का विशेषज्ञ बारीकी से जांच करेंगें औऱ इसमें लगने वाली आग और विस्फोट की कारणों का पता लगाएंगे जिसकी वजह से अरब सागर में डूब गई थी.
इसके अलावा 2300 टन वजन वाले इस पनडुब्बी के मरम्मत के बाद फिर से इस्तेमाल किए जा सकने की संभावना पर भी गौर किया जाएगा. अगर इसे फिर से इस्तेमाल नहीं किया जा सका तो इसे आधिकारिक तौर पर सेवा मुक्त कर दिया जाएगा.
जनवरी 2014 में बचाव अभियान के लिए भारत ने रिजॉल्व मरीन को 240 करोड़ रुपये का ठेका दिया था. काम पूरा करने के लिए 160 दिनों की मुहलत दी गई थी. अनुबंध के अनुसार बचाव टीम पनडुब्बी को तैरने के लायक बनाने के बाद भारतीय नौसेना को सौंप देगी. सौंप देने के बाद इसे दो परीक्षणों से गुजरना होगा.
• दुर्घटना के कारण का निर्धारण
• समुद्र में चलाने योग्य बनाने की जरूरत के लिहाज से काम की गुंजाइश पर निर्णय
आईएनएस सिंधुरक्षक के बारे में
रूस द्वारा निर्मित किलो– क्लास वाले भारतीय नौसेना की पनडुब्बी आईएनएस सिंधुरक्षक को तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने 1997 में आधाकारिक तौर पर शामिल किया था. 13 फरवरी 2006 को
किसी पनडुब्बी की यात्रा करने वाले वे पहले राष्ट्र प्रमुख और भारतीय सशस्त्र बलों के सुप्रीम कमांडर थे.
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