भारत ने 9 जून 2014 को
कर्नाटक के करवार के तट पर स्वदेशी युद्धपोत आईएनएस कोलकाता से अपने सुपरसोनिक
क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस का सफल परीक्षण किया. 2.5 से 2.8
मैक की रफ्तार वाले ब्रह्मोस मिसाल को भारत और रूस ने मिलकर बनाया
है और यह 290 किलोमीटर की दूरी के लक्ष्य पर निशाना साध सकता
है.
पहली बार किसी मिसाइल का स्वदेशी युद्धपोत से परीक्षण किया गया था. इसे जुलाई 2014 में भारतीय नौसेना में आधिकारिक तौर पर शामिल किया जाएगा. अब तक ब्रह्मोस मिसाइल रूस द्वारा निर्मित राजपूत–श्रेणी के विध्वंसक और तलवार श्रेणी के युद्धपोत पर तैनात किया गया है.
पहली बार किसी मिसाइल का स्वदेशी युद्धपोत से परीक्षण किया गया था. इसे जुलाई 2014 में भारतीय नौसेना में आधिकारिक तौर पर शामिल किया जाएगा. अब तक ब्रह्मोस मिसाइल रूस द्वारा निर्मित राजपूत–श्रेणी के विध्वंसक और तलवार श्रेणी के युद्धपोत पर तैनात किया गया है.
देश में विकसित युद्धपोत आईएनएस कोलकाता के बारे में
युद्धपोत आईएनएस कोलकाता को मझगांव डॉकयार्ड्स लिमिटेड ने विकसित किया है. 7000 टन की विस्थापन क्षमता के साथ यह सबसे बड़ा स्वदेशी युद्धपोत है. इसके अलावा यह भारती नौसेना के प्रोजेक्ट 15–अल्फा श्रृंखला के तहत विकसित किए जा रहे रडार की जद में नहीं आने वाले तीन विध्वंसक में से प्रमुख पोत है.
आईएनएस कोलकाता में 16–सेल यूनिवर्सल वर्टिकल लांचर मॉड्यूल (यूवीएलएम) लगा है जो ब्रह्मोस मिसाइलों को प्रक्षेपित कर सकता है. इसके अलावा, इसमें बराक सैम ( जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल) के लिए दो वर्टिकल लांचिंग सिस्टम्स भी है.
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