भारत-अमेरिका
आर्थिक और वित्तीय भागीदारी की चौथी वार्षिक बैठक (4th India US Economic
and Financial Partnership meeting) अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष के
मुख्यालय वाशिंगटन (IMF headquarters) में 14 अक्टूबर 2013 को संपन्न हो गई. अमेरिका में जारी
कामबंदी की वजह से यह बैठक अमेरिका वित्त विभाग में नहीं हो आयोजित की गई.
बैठक में भारत के वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम और अमेरिका के वित्त मंत्री जैक ल्यू ने भाग लिया. बैठक के दौरान भारत और अमेरिका लश्कर-ए-तैयबा, जमात-उद-दावा और हक्कानी नेटवर्क जैसे आतंकी संगठनों और इनसे जुड़े आतंकवादियों के वित्तीय ढांचे और धन उगाही की गतिविधियों को निशाना बनाने के लिए साथ मिलकर काम करने पर सहमत हुए.
बैठक में दोनों देशों के वित्तमंत्रियों ने आपसी आर्थिक सहयोग पर चर्चा की. साथ ही इस बात पर सहमति व्यक्त की कि मजबूत व्यापक आर्थिक नीतियां, बुनियादी सुधार और ठोस योजना से आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी.
दोनो नेताओं ने कर संबंधी विवादों के समतापूर्ण और सैद्धान्तिक समाधान और इस बारे में आपसी संबंधों को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की.
भारत और अमेरिका आपसी आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने तथा निवेश संबंधी मुद्दों को बेहतर ढंग से समझने पर सहमत हुए. दोनों देशों के वित्तमंत्रियों ने वाशिंगटन में बैठक के बाद एक संयुक्त वक्तव्य में कहा कि भारत अमेरिका में निवेश का तेजी से बढ़ता हुआ स्रोत बन गया है. वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी के बावजूद दोनों देशों के बीच माल और सेवाओं का व्यापार 2009 से 2012 के बीच 59 अरब 90 करोड़ डॉलर से बढ़कर 92 अरब 50 करोड़ डॉलर पहुंच गया.
बैठक के दौरान अमेरिका ने अपने व्यापक आव्रजन सुधार विधेयक में वीजा प्रावधानों और कराधान से जुडे मुद्दों पर भारत की चिंताओं को दूर करने में अपनी कठिनाईयों की जानकारी दी.
भारत-अमेरिका आर्थिक तथा वित्तीय भागीदारी की चौथी वार्षिक बैठक में चिदंबरम ने भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों की चिंताओं और वीजा से जुड़े मुद्दों को भी उठाया.
बैठक में भारत के वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम और अमेरिका के वित्त मंत्री जैक ल्यू ने भाग लिया. बैठक के दौरान भारत और अमेरिका लश्कर-ए-तैयबा, जमात-उद-दावा और हक्कानी नेटवर्क जैसे आतंकी संगठनों और इनसे जुड़े आतंकवादियों के वित्तीय ढांचे और धन उगाही की गतिविधियों को निशाना बनाने के लिए साथ मिलकर काम करने पर सहमत हुए.
बैठक में दोनों देशों के वित्तमंत्रियों ने आपसी आर्थिक सहयोग पर चर्चा की. साथ ही इस बात पर सहमति व्यक्त की कि मजबूत व्यापक आर्थिक नीतियां, बुनियादी सुधार और ठोस योजना से आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी.
दोनो नेताओं ने कर संबंधी विवादों के समतापूर्ण और सैद्धान्तिक समाधान और इस बारे में आपसी संबंधों को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की.
भारत और अमेरिका आपसी आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने तथा निवेश संबंधी मुद्दों को बेहतर ढंग से समझने पर सहमत हुए. दोनों देशों के वित्तमंत्रियों ने वाशिंगटन में बैठक के बाद एक संयुक्त वक्तव्य में कहा कि भारत अमेरिका में निवेश का तेजी से बढ़ता हुआ स्रोत बन गया है. वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी के बावजूद दोनों देशों के बीच माल और सेवाओं का व्यापार 2009 से 2012 के बीच 59 अरब 90 करोड़ डॉलर से बढ़कर 92 अरब 50 करोड़ डॉलर पहुंच गया.
बैठक के दौरान अमेरिका ने अपने व्यापक आव्रजन सुधार विधेयक में वीजा प्रावधानों और कराधान से जुडे मुद्दों पर भारत की चिंताओं को दूर करने में अपनी कठिनाईयों की जानकारी दी.
भारत-अमेरिका आर्थिक तथा वित्तीय भागीदारी की चौथी वार्षिक बैठक में चिदंबरम ने भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों की चिंताओं और वीजा से जुड़े मुद्दों को भी उठाया.
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