वर्ष 2016 के लिए रसायन विज्ञान क्षेत्र के नोबल पुरस्कारों की घोषणा की गयी. इसमें फ़्रांस के जीन पियरे शावेज़, ब्रिटेन के जे फ्रेज़र स्टोडार्ट एवं नीदरलैंड के बर्नार्ड फेरिंगा को इस वर्ष का रसायन विज्ञान का नोबल पुरस्कार दिया जायेगा. इस संबंध में 5 अक्टूबर 2016 को घोषणा की गयी. तीनों वैज्ञानिकों को आणविक मशीनों के अविष्कार तथा नैनो तकनीकी को नए स्तर पर ले जाने हेतु इस पुरस्कार के लिए चयनित किया गया. यह तीनों वैज्ञानिक संयुक्त रूप से 9.33 लाख डॉलर (लगभग 6.21 करोड़ रुपये) की पुरस्कार राशि साझा करेंगे.
तीनों वैज्ञानिकों द्वारा की गयी खोज
• पुरस्कार का चयन करने वाली ज्यूरी के अनुसार तीनों वैज्ञानिकों ने नियंत्रणीय गति के साथ अणुओं का विकास करने में सफलता प्राप्त की जो उर्जा संचार होने के लक्ष्य को पूरा करने में सक्षम है.
• वैज्ञानिकों की इस खोज के कारण साधारण मशीन से कई गुना छोटी आणविक मशीन बनाने की दिशा में प्रयोग किये गये.
• यह बाल से हज़ार गुना छोटी मशीन है जिसे चलाने के लिए नैनो मोटर का विकास किया गया.
• ज्यूरी का मानना है कि यह आणविक मशीन वर्ष 1830 में बनाई गयी इलेक्ट्रॉनिक मोटर के समान है जिसे बनाये जाने के बाद पंखों, वाशिंग मशीन, फ़ूड प्रोसेसर आदि की खोज की गयी.
• पुरस्कार की घोषणा करते हुए ज्यूरी सदस्यों ने कहा कि इन आणविक मशीनों द्वारा सेंसर, उर्जा भंडारण तथा उर्जा आकार को नई दिशा मिल सकेगी.
चयन प्रक्रिया
रसायन विज्ञान में नोबल पुरस्कार प्रत्याशियों के नामों के नामांकन के आधार पर दिए जाते हैं. नोबल पुरस्कार संस्था के अनुसार नामांकित प्रत्याशियों के नाम के बारे में अगले 50 वर्षों तक खुलासा नहीं किया जाता. रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ़ साइंसेज की कमेटी द्वारा रसायन विज्ञान के क्षेत्र में दिए जाने वाले पुरस्कार का अंतिम चयन किया जाता है.
नोबल कमिटी द्वारा चयनित व्यक्तियों को रसायन विज्ञान के क्षेत्र में पुरस्कार हेतु नामांकन दाखिल करने के लिए आमंत्रण भेजा जाता है. केवल यह चुनिंदा व्यक्ति ही प्रत्याशियों के नामों का चुनाव कर सकते हैं, कोई भी प्रत्याशी स्वयं को नामांकित नहीं कर सकता उसे केवल इन चयनित व्यक्तियों के आमंत्रण के आधार पर ही प्रवेश मिलता है.
रसायन विज्ञान के नोबल पुरस्कार से सम्बंधित तथ्य
• वर्ष 1901 से 2016 तक 108 पुरस्कार दिए जा चुके हैं.
• अब तक केवल 4 महिला वैज्ञानिकों को यह पुरस्कार दिया गया.
• फ्रेडरिक संगेर को दो बार, 1958 और 1980 में, पुरस्कार दिया गया.
• फ्रेडरिक जोलियट अब तक के सबसे कम उम्र के विजेता है जिन्हें 1935 में मात्र 35 वर्ष की आयु में रसायन विज्ञान में नोबल पुरस्कार दिया गया.
• वर्ष 2002 में जॉन बी फेन 85 वर्ष की आयु में सबसे अधिक आयु के विजेता बने.
• विजेताओं की औसत आयु 58 वर्ष है.
• रसायन विज्ञान में मरणोपरांत पुरस्कार नहीं दिया जाता.
• वर्ष 1901 में जैकब हेनरीक्स रसायन विज्ञान में नोबल पुरस्कार प्राप्त करने वाले पहले विजेता थे.
रसायन विज्ञान में नोबल पुरस्कार प्रत्याशियों के नामों के नामांकन के आधार पर दिए जाते हैं. नोबल पुरस्कार संस्था के अनुसार नामांकित प्रत्याशियों के नाम के बारे में अगले 50 वर्षों तक खुलासा नहीं किया जाता. रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ़ साइंसेज की कमेटी द्वारा रसायन विज्ञान के क्षेत्र में दिए जाने वाले पुरस्कार का अंतिम चयन किया जाता है.
नोबल कमिटी द्वारा चयनित व्यक्तियों को रसायन विज्ञान के क्षेत्र में पुरस्कार हेतु नामांकन दाखिल करने के लिए आमंत्रण भेजा जाता है. केवल यह चुनिंदा व्यक्ति ही प्रत्याशियों के नामों का चुनाव कर सकते हैं, कोई भी प्रत्याशी स्वयं को नामांकित नहीं कर सकता उसे केवल इन चयनित व्यक्तियों के आमंत्रण के आधार पर ही प्रवेश मिलता है.
रसायन विज्ञान के नोबल पुरस्कार से सम्बंधित तथ्य
• वर्ष 1901 से 2016 तक 108 पुरस्कार दिए जा चुके हैं.
• अब तक केवल 4 महिला वैज्ञानिकों को यह पुरस्कार दिया गया.
• फ्रेडरिक संगेर को दो बार, 1958 और 1980 में, पुरस्कार दिया गया.
• फ्रेडरिक जोलियट अब तक के सबसे कम उम्र के विजेता है जिन्हें 1935 में मात्र 35 वर्ष की आयु में रसायन विज्ञान में नोबल पुरस्कार दिया गया.
• वर्ष 2002 में जॉन बी फेन 85 वर्ष की आयु में सबसे अधिक आयु के विजेता बने.
• विजेताओं की औसत आयु 58 वर्ष है.
• रसायन विज्ञान में मरणोपरांत पुरस्कार नहीं दिया जाता.
• वर्ष 1901 में जैकब हेनरीक्स रसायन विज्ञान में नोबल पुरस्कार प्राप्त करने वाले पहले विजेता थे.
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