प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एवं तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता ने 10 अगस्त 2016 को कुडनकुलम परमाणु उर्जा संयंत्र की पहली ईकाई देश को समर्पित की.इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा की कि 1000 मेगावाट के पांच अतिरिक्त उर्जा संयंत्र भी शीघ्र ही देश को समर्पित किये जायेंगे. कुडनकुलम परमाणु उर्जा परियोजना तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले में स्थित है.
कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र (ईकाई-1)
• यह संयंत्र भारत परमाणु ऊर्जा निगम एवं रूस के एटमॉसट्रॉय एक्सपोर्ट कम्पनी द्वारा संयुक्त रूप से बनाया गया है.
• यह संयंत्र रूस की सभी आधुनिक तकनीकों से सुसज्जित है.
• पहले संयंत्र का निर्माण 13 जुलाई 2013 को 11.05 सांयकाल को पूरा हुआ.
• इस पहली ईकाई में अप्रैल 2014 से 73 प्रतिशत कार्यारंभ कर दिया गया था.
• इसने अपनी अधिकतम क्षमता 1000 मेगावाट का उत्पादन 7 जून 2014 से आरंभ किया.
• संयंत्र का वाणिज्यिक उपयोग 31 दिसम्बर 2014 से आरंभ हुआ.
• इस परियोजना की 85 प्रतिशत फंडिंग रूस द्वारा की जा रही है.
पृष्ठभूमि
• भारत सरकार ने इस संदर्भ में 1988 में सोवियत यूनियन के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किये.
• दोनों देशों में मौजूद राजनैतिक एवं आर्थिक दिक्कतों के कारण निर्माण कार्य 1997 में आरंभ हुआ.
• स्थानीय ग्रामीणों एवं किसानों द्वारा किये जा रहे प्रदर्शनों के कारण पहली दो ईकाईयों का निर्माण कार्य सितंबर 2011 को रोक दिया गया.
• संयंत्र के पुनःनिर्माण का कार्य मार्च 2012 में आरंभ हुआ.
• इस परियोजना से तमिलनाडु को 925 मेगावाट, कर्नाटक को 442 मेगावाट, पुडुचेरी को 67 मेगावाट एवं 300 मेगावाट उर्जा अन्य राज्यों को दी जाएगी.
• यह संयंत्र भारत परमाणु ऊर्जा निगम एवं रूस के एटमॉसट्रॉय एक्सपोर्ट कम्पनी द्वारा संयुक्त रूप से बनाया गया है.
• यह संयंत्र रूस की सभी आधुनिक तकनीकों से सुसज्जित है.
• पहले संयंत्र का निर्माण 13 जुलाई 2013 को 11.05 सांयकाल को पूरा हुआ.
• इस पहली ईकाई में अप्रैल 2014 से 73 प्रतिशत कार्यारंभ कर दिया गया था.
• इसने अपनी अधिकतम क्षमता 1000 मेगावाट का उत्पादन 7 जून 2014 से आरंभ किया.
• संयंत्र का वाणिज्यिक उपयोग 31 दिसम्बर 2014 से आरंभ हुआ.
• इस परियोजना की 85 प्रतिशत फंडिंग रूस द्वारा की जा रही है.
पृष्ठभूमि
• भारत सरकार ने इस संदर्भ में 1988 में सोवियत यूनियन के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किये.
• दोनों देशों में मौजूद राजनैतिक एवं आर्थिक दिक्कतों के कारण निर्माण कार्य 1997 में आरंभ हुआ.
• स्थानीय ग्रामीणों एवं किसानों द्वारा किये जा रहे प्रदर्शनों के कारण पहली दो ईकाईयों का निर्माण कार्य सितंबर 2011 को रोक दिया गया.
• संयंत्र के पुनःनिर्माण का कार्य मार्च 2012 में आरंभ हुआ.
• इस परियोजना से तमिलनाडु को 925 मेगावाट, कर्नाटक को 442 मेगावाट, पुडुचेरी को 67 मेगावाट एवं 300 मेगावाट उर्जा अन्य राज्यों को दी जाएगी.
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