दिल्ली हाईकोर्ट ने 4 अगस्त 2016 को कहा की लेफ्टिनेंट गवर्नर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के प्रशासनिक प्रमुख हैं.
फैसले के प्रमुख तथ्य:
• दिल्ली अभी भी एक केन्द्र शासित प्रदेश ही है और संविधान के अनुच्छेद-239 एए के तहत इसके लिए विशेष प्रावधान किया गया है.
• हाईकोर्ट ने कहा कि दिल्ली सरकार की इस दलील में दम नहीं है कि लेफ्टिनेंट गवर्नर दिल्ली सरकार की मंत्री परिषद की सलाह मानने के लिए बाध्य हैं.
• हाईकोर्ट ने ये भी साफ कर दिया कि अधिकारियों की नियुक्ति और तबादले का अधिकार दिल्ली सरकार के पास नहीं बल्कि केंद्र सरकार के पास है.
• दिल्ली में CNG फिटनेस घोटाले पर बना जांच आयोग खारिज हो चुका है. दिल्ली सरकार ने CNG फिटनेस सर्टिफिकेट लगाने के ठेके से संबंधित मामले की जांच के लिए जांच आयोग का गठन किया था. हाईकोर्ट ने कहा कि नियम के तहत इसके लिए लेफ्टिनेंट गवर्नर से सहमति नहीं ली गई थी.
• दिल्ली सरकार ने दिसंबर 2015 में DDCA की अनियमितता की जांच के आदेश दिए थे, लेकिन इसमें भी लेफ्टिनेंट गवर्नर की सहमति नहीं ली गई थी.
• दिल्ली एक आंशिक राज्य है, पूर्ण राज्य नहीं है. वर्ष 1991 में संविधान में संशोधन से दिल्ली को विशिष्ट संवैधानिक दर्जा और विधानसभा मिली थी.
• संविधान के अनुच्छेद 239 एए और एबी में दिल्ली के उपराज्यपाल को दूसरे राज्यों के राज्यपालों से ज़्यादा संवैधानिक शक्तियां दी गई हैं.
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