8 जून 2016 को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने थाइलैंड, अर्मेनिया, बेलारूस और मोलडोवा में माता-से-बच्चे में एचआईवी और सिफलिस के संचरण के उन्मूलन की पुष्टि कर दी.
यह घोषणा न्यूयॉर्क में एड्स के समाप्त होने पर संयुक्त राष्ट्र महा-सभा में हुई उच्च–स्तरीय बैठक की पूर्व संध्या पर की गई. इस अवसर पर इन चारों देशों के प्रतिनिधियों को इस उपलब्धि के लिए मान्यता प्रमाणपत्र दिया गया.
इस उल्लेखनीय उपलब्धि के साथ थाइलैंड माता-से-बच्चों में दोनों प्रकार के संक्रमण के संचरण का उन्मूलन करने वाला एशिया और प्रशांत क्षेत्र का पहला देश बन गया है.
उपलब्धि कैसे हासिल की?
• इन देशों में प्रसवपूर्व देखभाल का जल्द शुरु होना, गर्भवती महिलाओं और उनके भागीदारों में एचआईवी औऱ सिफलिस की जांच को सुनिश्चित करने के लिए काम किया गया.
• जिन महिलाओं की जांच पॉजिटिव पाई गई, उनके साथ– साथ उनके बच्चे को भी इलाज मुहैया कराया गया.
• मावाधाकिरों और लैंगिक समानता के साथ सुसंगतता में प्रजनन स्वास्थ्य जानकारी के बारे में प्रावधना, समुदाय की संलिप्तता और हाशिए पर गुजर–बसर करने वाली आबादी की आउटरीच ने इस तरह की सुविधा प्रदान करने में मदद की.
ये उपलब्धियां इन मुख्य कारकों की वसीयत हैं– लैंगिक, प्रजनन स्वास्थ्य एवं एचआईवी सेवाओं के साथ मातृत्व एवं शिशु स्वास्थ्य का एकीकरण.यह एकीकरण डब्ल्यूएचओ की एचआईवी पर बनी नई स्वास्थ्य क्षेत्र रणनीतियों, यौन संचारित संक्रमण और वायरल हेपेटाइटिस को एक साथ लाता है और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की प्राप्ति और सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति का मूल है.
उपलब्धि कैसे हासिल की?
• इन देशों में प्रसवपूर्व देखभाल का जल्द शुरु होना, गर्भवती महिलाओं और उनके भागीदारों में एचआईवी औऱ सिफलिस की जांच को सुनिश्चित करने के लिए काम किया गया.
• जिन महिलाओं की जांच पॉजिटिव पाई गई, उनके साथ– साथ उनके बच्चे को भी इलाज मुहैया कराया गया.
• मावाधाकिरों और लैंगिक समानता के साथ सुसंगतता में प्रजनन स्वास्थ्य जानकारी के बारे में प्रावधना, समुदाय की संलिप्तता और हाशिए पर गुजर–बसर करने वाली आबादी की आउटरीच ने इस तरह की सुविधा प्रदान करने में मदद की.
ये उपलब्धियां इन मुख्य कारकों की वसीयत हैं– लैंगिक, प्रजनन स्वास्थ्य एवं एचआईवी सेवाओं के साथ मातृत्व एवं शिशु स्वास्थ्य का एकीकरण.यह एकीकरण डब्ल्यूएचओ की एचआईवी पर बनी नई स्वास्थ्य क्षेत्र रणनीतियों, यौन संचारित संक्रमण और वायरल हेपेटाइटिस को एक साथ लाता है और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की प्राप्ति और सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति का मूल है.
माता-से-शिशु में एचआईवी और सिफलिस के संक्रमण का उन्मूलन वर्ष 2030 तक यौन संचारित संक्रमणों का मुकाबला करने और एड्स को समाप्त करने के वैश्विक प्रयास की कुंजी है.
वर्ष 2014 में माता-से-शिशु में एचआईवी और सिफलिस के संक्रमण को रोकने के लिए कार्यक्रम में डब्लयूएचओ और उसके भागीदारों ने माता-से-शिशु में दोनों संक्रमणों के संचरण के उन्मूलन को मान्य बनाने के लिए देश की प्रगति में कठोर समीक्षा के माध्यम से वैश्विक प्रक्रियाओं एवं मानदंड को विकसित किया.
माता-से-शिशु में संचरण की रोकथाम का इलाज 100% प्रभावी नहीं है, संचरण के उन्मूलन को इस प्रकार परिभाषित कर सकते हैं कि संचरण को इस स्तर तक कम कर देना जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या न पैदा हो.
30 जून 2015 को माता-से-शिशु में एचआईवी और सिफलिस के संचरण के उन्मूलन हेतु मान्यता प्राप्त करने वाला पहला देश क्यूबा बना था.
पृष्ठभूमि
वर्ष 2007 में डब्ल्यूएचओ ने जन्मजात सिफलिस के वैश्विक उन्मूलन की शुरुआत की. रणनीति का उद्देश्य गर्भवती महिलाओँ के लिए सिफलिस की जांच और उपचार की वैश्विक पहुंच को बढ़ाना था.
वर्ष 2011 में यूएनएआईडीएस ने विश्व स्वास्थ्य संगठन और अन्य भागीदारों के साथ मिलकर वर्ष 2015 तक बच्चों में एचआईवी के नए संक्रमण के उन्मूलन और उनकी माताओं को जीवित रखने के लिए ग्लोबल पैन का शुभारंभ किया. इस वैश्विक आंदोलन ने बच्चे एचआईवी से मुक्त रहें और उनकी माताएं भी जीवित रहें, को सुनिश्चित करने के लिए राजनीतिक नेतृत्व, नवाचार को प्रेरित और समुदायों को जागृत बनाया.
पृष्ठभूमि
वर्ष 2007 में डब्ल्यूएचओ ने जन्मजात सिफलिस के वैश्विक उन्मूलन की शुरुआत की. रणनीति का उद्देश्य गर्भवती महिलाओँ के लिए सिफलिस की जांच और उपचार की वैश्विक पहुंच को बढ़ाना था.
वर्ष 2011 में यूएनएआईडीएस ने विश्व स्वास्थ्य संगठन और अन्य भागीदारों के साथ मिलकर वर्ष 2015 तक बच्चों में एचआईवी के नए संक्रमण के उन्मूलन और उनकी माताओं को जीवित रखने के लिए ग्लोबल पैन का शुभारंभ किया. इस वैश्विक आंदोलन ने बच्चे एचआईवी से मुक्त रहें और उनकी माताएं भी जीवित रहें, को सुनिश्चित करने के लिए राजनीतिक नेतृत्व, नवाचार को प्रेरित और समुदायों को जागृत बनाया.
0 comments:
Post a Comment