कृषि की घटती पैदावार के कारण लोगों के वजन एवं खान-पान में हो रहे बदलाव के कारण वर्ष 2050 में 5,00,000 लोगों की मृत्यु हो सकती है.
इसका ब्यौरा लांसेट पत्रिका में 2 मार्च 2016 को प्रकाशित एक अध्ययन में दिया गया. यह शोध ऑक्सफ़ोर्ड मार्टिन फ्यूचर ऑफ़ फ़ूड प्रोग्राम द्वारा किया गया. यह खानपान एवं शरीर के वजन को लेकर किया गया पहला अध्ययन है.
इस अध्ययन में विभिन्न देशों को शामिल किया गया एवं उनमें रह रहे लोगों के वजन तथा खानपान को ध्यान में रखकर यह पता लगा कि वर्ष 2050 में 155 देशों के लोग इससे प्रभावित होंगे तथा चीन में सबसे अधिक मौतें होंगी.
एक अनुमान के अनुसार, वर्ष 2050 में चीन में प्रति एक मिलियन व्यक्तियों पर 251 लोगों की मृत्यु हो सकती है जबकि भारत में यह आंकड़ा 105 दर्ज किया गया.
इसका ब्यौरा लांसेट पत्रिका में 2 मार्च 2016 को प्रकाशित एक अध्ययन में दिया गया. यह शोध ऑक्सफ़ोर्ड मार्टिन फ्यूचर ऑफ़ फ़ूड प्रोग्राम द्वारा किया गया. यह खानपान एवं शरीर के वजन को लेकर किया गया पहला अध्ययन है.
इस अध्ययन में विभिन्न देशों को शामिल किया गया एवं उनमें रह रहे लोगों के वजन तथा खानपान को ध्यान में रखकर यह पता लगा कि वर्ष 2050 में 155 देशों के लोग इससे प्रभावित होंगे तथा चीन में सबसे अधिक मौतें होंगी.
एक अनुमान के अनुसार, वर्ष 2050 में चीन में प्रति एक मिलियन व्यक्तियों पर 251 लोगों की मृत्यु हो सकती है जबकि भारत में यह आंकड़ा 105 दर्ज किया गया.
अध्ययन के मुख्य बिंदु
• यदि वैश्विक कार्बन उत्सर्जन को रोकने के लिए कड़े कदम नहीं उठाये गये तो वर्ष 2050 में उत्पादकता एक तिहाई कम हो जाएगी.
• प्रति व्यक्ति यह कमी 3.2 प्रतिशत प्रति व्यक्ति होगी (99 किलो कैलोरी प्रतिदिन). फल एवं सब्जियों में यह 4.0 प्रतिशत (14.9 ग्राम प्रतिदिन) एवं रेड मीट में यह 0.7 प्रतिशत (0.5ग्राम प्रतिदिन) होगी.
• वर्ष 2050 में इससे 5,29,000 अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं.
• वर्ष 2050 में फल एवं सब्जियों के कम सेवन द्वारा अल्पपोषण के कारण मरने वालों से भी दोगुनी मौतें होंगी.
• खाद्य उत्पादन में परिवर्तन की वजह से जलवायु संबंधित मौतों की तीन-चौथाई मौतें चीन (248000) एवं भारत (136000) में होने का अनुमान है.
• निम्न और माध्यम आय वाले देशों में स्थिती बेहद चिंताजनक रहेगी. मुख्य रूप से पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में (264000) एवं दक्षिणपूर्व एशिया (164000) में अधिक मौतें हो सकती हैं.
• जलवायु परिवर्तन को काबू में करने से 29-71 प्रतिशत तक मौतें कम हो सकती हैं.
• उदहारणस्वरुप मध्यम उत्सर्जन परिदृश्य में (जिसमें वैश्विक तापमान वर्ष 2046-65 तक 1.3 से 1.4 डिग्री बढ़ सकता है) भोजन एवं वजन सम्बन्धी मौतें अत्यधिक उत्सर्जन की तुलना में एक तिहाई कम होंगी.
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