शोधकर्ताओं ने पश्चिमी घाट की सहयाद्री पर्वत श्रृंखला में सांप की नई 'ब्लैक शिल्डटेल' प्रजाति की खोज की.
चार वैज्ञानिकों की टीम ने सांप की ऐसी प्रजाति को खोज की जो 144 वर्ष के दौरान वहां दिखाई नहीं दी थी. इस सांप का नाम भारतीय सर्प विज्ञान संस्था के संस्थापक नीलम कुमार खैरे के नाम पर रखा गया. यह अनुसंधान हाल ही में साइंटिफिक जर्नल, जूटाक्षा में प्रकाशित हुआ.
नेशनल सेंटर फॉर बायोलोजिकल साइंसेज के अनुसंधानकर्ता डॉ वरद गिरि के अनुसार अनुसंधानकर्ताओं की टीम ने 144 वर्ष के अंतराल के बाद सांप की नई प्रजाति को खोजा है.
नेशनल हिस्ट्री म्यूजियम लंदन, नेशनल सेंटर फॉर बायोलोजिकल साइंसेज बंगलुरु, इंडियन हर्पिटोलोजिस्ट सोसायटी पुणो तथा बांबे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी के विज्ञानियों ने मिल कर यह अनुसंधान किया.
15 वर्ष तक चले अनुसंधान की सफलता का मुख्य श्रेय डॉ डेविड ग्रोवर, डॉ मार्क विल्किंसन, डॉ वरदगिरि तथा अशोक कैप्टन को जाता है.
इस सांप को ‘ब्लैक शील्डटेल’ के रूप में भी जाना जाता है. इससे पहले इसकी तीन प्रजातियों का ही पता था नीले और चमकीले रंग के कृष्ण वर्णीय सांप की यह पहली प्रजाति है. यह महाराष्ट्र, गोवा और उत्तरी कर्नाटक में पाया जाता है. आमतौर पर इसका आकार छोटा होता है, अब तक देखे गए सबसे लंबे सांप की लंबाई 550 मिलीमीटर थी.
'ब्लैक शिल्डटेल' के बारे में
'ब्लैक शिल्डटेल' के बारे में
- यह कृष्ण वर्णीय (चमकीले नीले और काले रंग) और बिना जहर वाला सांप है.
- यह पश्चिमी घाटी के दक्षिण महाराष्ट्र, गोवा, उत्तर कर्नाटक, सहयाद्री पर्वतमाला के जंगलों में पाया जाता है.
- अब तक इस प्रकार के सांपों की चार प्रजातियां मिली हैं.
- इस प्रजाति के सांप की लंबाई 1.5 फिट तक होती है.
- जमीन में बिल बनाते हैं और अधिकतर समय भूमिगत ही रहते हैं और कीड़े-मकोड़े खाते हैं. .
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