झारखंड सरकार ने राज्य में जादू-टोने जैसी घटनाओं से संबंधित क्रियाकलापों पर त्वरित कार्रवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन को 12 जनवरी 2016 को मंजूरी दी. इसके तहत जादू-टोने जैसी घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई हेतु फास्ट ट्रैक कोर्ट राज्य के पांच जिलों में स्थापित की जाएंगी.
उपरोक्त घोषणा के अनुसार, फास्ट ट्रैक कोर्ट रांची, पश्चिम सिंहभूम, खूंटी, पलामू और सिमडेगा जिलों में स्थापित की जाएंगी. जहां जादू-टोने की घटनाओं के अधिकतम मामले दर्ज होते हैं.
विदित हो कि झारखंड में हर साल लगभग 40-50 महिलाओं को चुड़ैल घोषित कर मार दिया जाता है. राज्य के गठन के बाद से अबतक इस अंधविश्वास से 700 से अधिक महिलाओं की जाने जा चुकी हैं. झारखंड सरकार ने इन घटनाओं को रोकने के लिए वर्ष 2001 में एंटी-विचक्राफ्ट कानून बनाया था. इसके अलावा इन मामलों पर नजर रखने के लिए एक विशेष जांच दल भी गठित किया गया था, लेकिन सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस कानून को बेहद कमजोर करार दिया था. जिसके बाद सरकार ने इस विषय को लेकर कड़े कदम उठाए और इन अदालतों के गठन को मंजूरी दी.
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