भारत सरकार ने 13 जनवरी 2016 को राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना (एनआरसीपी) के अंतर्गत पुणे में मूला मूथा नदी की सफाई के लिए जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (जीआईसीए) के साथ ऋण समझौते पर हस्तानक्षर किए.
जापान इस परियोजना के लिए 0.30 प्रतिशत वार्षिक ब्याएज दर से भारत सरकार को 19.064 बिलियन येन (लगभग 1000 करोड़ रूपऐ) का ऋण उपलब्ध कराएगा.
केंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा 990.26 करोड़ रूपऐ की अनुमानित लागत से इस परियोजना के लिए ऋण सहायता को मंजूरी दे दी गई है.
परियोजना की लागत में भारत सरकार और परियोजना कार्यान्वित करने वाली एजेंसी, पुणे नगर निगम (पीएमसी) का हिस्सार क्रमश: 85:15 के अनुपात होगा.
इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार 841.72 करोड़ रूपऐ और पीएमसी 148.54 करोड़ रूपऐ देगी.
भारत सरकार को ऋण का भुगतान 40 वर्ष में करना होगा जिसमें 10 वर्ष की रियायत अवधि शामिल है.
यह परियोजना जनवरी, 2022 तक पूरी होनी है.
परियोजना के अंतर्गत प्रमुख प्रस्तावित घटकों में 11 नये सीवेज ट्रीटमेंट संयंत्रों का निर्माण (एसटीपी) और 4 वर्तमान मध्य्म पंपिंग स्टेीशनों का पुनरूद्धार/पुर्नस्थापन शामिल है.
परियोजना के पूरे होने पर पुणे में उपलब्ध कुल एसटीपी क्षमता 873 एमएलडी हो जायेगी जो वर्ष 2027 तक के लिए सीवेज से निपटने के लिए पर्याप्त होगी.
विदित हो केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा चिन्हित देशभर की 302 प्रदूषित नदियों में से पुणे की मूला मूथा नदी एक है.
यह परियोजना नदी में प्रदूषण कम करने और जल की गुणवत्ता में सुधार लाने में महत्वलपूर्ण साबित होगी.
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