चार यूरोपियन देशों जर्मनी, नॉर्वे, स्वीडन एवं स्विट्ज़रलैंड ने 30 नवम्बर 2015 को पेरिस में परिवर्तनकारी कार्बन एसेट सुविधा (टीसीएएफ) कार्यक्रम आरंभ किया ताकि विकासशील देशों में जलवायु परिवर्तन पर वृहद स्तर पर कार्यवाही की जा सके. वर्ल्ड बैंक ग्रुप इन देशों के साथ इस कार्यक्रम को बढ़ाने में भूमिका निभा रहा है.
500 मिलियन के इस कार्यक्रम में ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को रोकने के नए उपायों की खोज की जाएगी ताकि जलवायु परिवर्तन संबंधी हो रहे नुकसान से बचा जा सके.
500 मिलियन के इस कार्यक्रम में ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को रोकने के नए उपायों की खोज की जाएगी ताकि जलवायु परिवर्तन संबंधी हो रहे नुकसान से बचा जा सके.
परिवर्तनकारी कार्बन एसेट सुविधा
• इसके अंतर्गत कार्बन उत्सर्जन कम करने के उपायों पर विभिन्न देशों के साथ नए उपायों की खोज की जाएगी.
• उत्सर्जन को कम करने के लिए अक्षय ऊर्जा, परिवहन, ऊर्जा दक्षता, ठोस कचरा प्रबंधन और कम कार्बन उत्सर्जन वाले शहरों पर बल दिया जायेगा.
• इसके अंतर्गत जो देश कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए ठोस कदम उठा रहे हैं उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए भुगतान भी किया जायेगा.
• यह वैश्विक पहल और राष्ट्रीय जलवायु योजना की एक सीमा के साथ काम करेंगे जिससे विकसित एवं विकासशील दोनों देशों को लाभ होगा.
• यह अन्तरराष्ट्रीय मानकों के तहत उच्च पर्यावरण अखंडता को बनाये रखने हेतु अन्तरराष्ट्रीय समुदाय के साथ कार्य करेगा.
• यह वर्ष 2016 से कार्य करना आरंभ करेगा जिसके तहत विभिन्न देशों द्वारा 250 मिलियन अमेरिकी डॉलर का योगदान दिया जायेगा.
• पूंजीगत योगदान की सीमा तब तक खुली रहेगी जब तक 500 मिलियन अमेरिकी डॉलर का लक्ष्य हासिल नहीं किया जाता.
• एक अनुमान के अनुसार, इस नई सुविधा में विश्व बैंक समूह द्वारा 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश किया जायेगा.
• उत्सर्जन को कम करने के लिए अक्षय ऊर्जा, परिवहन, ऊर्जा दक्षता, ठोस कचरा प्रबंधन और कम कार्बन उत्सर्जन वाले शहरों पर बल दिया जायेगा.
• इसके अंतर्गत जो देश कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए ठोस कदम उठा रहे हैं उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए भुगतान भी किया जायेगा.
• यह वैश्विक पहल और राष्ट्रीय जलवायु योजना की एक सीमा के साथ काम करेंगे जिससे विकसित एवं विकासशील दोनों देशों को लाभ होगा.
• यह अन्तरराष्ट्रीय मानकों के तहत उच्च पर्यावरण अखंडता को बनाये रखने हेतु अन्तरराष्ट्रीय समुदाय के साथ कार्य करेगा.
• यह वर्ष 2016 से कार्य करना आरंभ करेगा जिसके तहत विभिन्न देशों द्वारा 250 मिलियन अमेरिकी डॉलर का योगदान दिया जायेगा.
• पूंजीगत योगदान की सीमा तब तक खुली रहेगी जब तक 500 मिलियन अमेरिकी डॉलर का लक्ष्य हासिल नहीं किया जाता.
• एक अनुमान के अनुसार, इस नई सुविधा में विश्व बैंक समूह द्वारा 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश किया जायेगा.
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