भारत को 4 दिसम्बर 2015 को कनाडा से लगभग 2730 टन यूरेनियम की पहली खेप प्राप्त हुई. यह यूरेनियम भारत के परमाणु उर्जा संयंत्रों के लिए लाया गया.
यह खेप उत्तरी सस्केचेवान स्थित केमको के मेकआर्थर रिवर एवं की लेक पर तैयार हुई है.
यह खेप उत्तरी सस्केचेवान स्थित केमको के मेकआर्थर रिवर एवं की लेक पर तैयार हुई है.
खेप सम्बन्धी बिंदु
• यह खेप कनाडा की केमको इंक द्वारा भेजी गयी है जिसके लिए भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वर्ष 2015 में ओटावा यात्रा के दौरान समझौता हुआ था.
• इससे चार दशक पहले वर्ष 1974 में भारत द्वारा पहला परमाणु परीक्षण करने पर कनाडा ने विरोध दर्ज किया था. कनाडा ने भारत को किसी भी प्रकार का यूरेनियम उपलब्ध कराने पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगा दिया था.
भारत-कनाडा परमाणु समझौता
• अप्रैल 2015 में, केमको ने भारत के साथ यूरेनियम आपूर्ति हेतु एक समझौते पर हस्ताक्षर किये जिसे सितंबर 2013 में हुए भारत-कनाडा परमाणु सहयोग समझौते के आधार पर तैयार किया गया.
• इस समझौते के अनुसार कनाडा की केमको कारपोरेशन भारत को वर्ष 2020 तक 7.1 मिलियन टन यूरेनियम उपलब्ध कराएगी.
• इस समझौते की लागत 350 मिलियन अमेरिकी डॉलर है.
• यह खेप कनाडा की केमको इंक द्वारा भेजी गयी है जिसके लिए भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वर्ष 2015 में ओटावा यात्रा के दौरान समझौता हुआ था.
• इससे चार दशक पहले वर्ष 1974 में भारत द्वारा पहला परमाणु परीक्षण करने पर कनाडा ने विरोध दर्ज किया था. कनाडा ने भारत को किसी भी प्रकार का यूरेनियम उपलब्ध कराने पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगा दिया था.
भारत-कनाडा परमाणु समझौता
• अप्रैल 2015 में, केमको ने भारत के साथ यूरेनियम आपूर्ति हेतु एक समझौते पर हस्ताक्षर किये जिसे सितंबर 2013 में हुए भारत-कनाडा परमाणु सहयोग समझौते के आधार पर तैयार किया गया.
• इस समझौते के अनुसार कनाडा की केमको कारपोरेशन भारत को वर्ष 2020 तक 7.1 मिलियन टन यूरेनियम उपलब्ध कराएगी.
• इस समझौते की लागत 350 मिलियन अमेरिकी डॉलर है.
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