जल और जलवायु परिवर्तन के अनुकूलन पर पेरिस संधि की घोषणा-(08-DEC-2015) C.A

| Tuesday, December 8, 2015
2 दिसंबर 2015 को विभिन्न देशों, नदी बेसिन संगठनों, व्यापार एवं नागरिक समाज के व्यापक गठबंधन ने जल और जलवायु परिवर्तन अनुकूलन पर अंतरराष्ट्रीय पेरिस संधि के निर्माण की घोषणा की.
जलवायु परिवर्तन पर लीमा में पेरिस कार्रवाई एजेंडा के तहत आयोजित वाटर रीसाइलेंस फोकस इवेंट में यह घोषणा की गई. यह इवेंट पेरिस, फ्रांस में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन 2015 (सीओपी21) के मौके पर आयोजित किया गया. 

पेरिस संधि की मुख्य विशेषताएं 
• इसका उद्देश्य मानव विकास की नींव जल प्रणाली को जलवायु प्रभावों के मुकाबले अधिक लचीला बनाना है. 
• जल और जलवायु परिवर्तन अनुकूलन पर बने पेरिस संधि के तहत 290 से अधिक जल बेसिन संगठन शामिल हैं. 
• इसमें कई देश सीमा पार नदी बेसिन संगठन, सरकारें, वित्त पोषण एजेंसियां, स्थानीय सरकारें, कंपनियां और नागरिक समाज शामिल हैं. 
• इसमें अनुकूलन योजना को लागू करने, जल निगरानी और नदी घाटी में माप प्रणालियों को मजबूत बनाने के लिए व्यक्तिगत प्रतिस्पर्धाओं को शामिल किया गया हैं.
• यह वित्तीय स्थिरता और जल प्रणाली प्रबंधन में नए निवेश को बढ़ावा देता है.

संधि के तहत प्रमुख सहयोगी परियोजनाएं तकनीकी सहायता में 20 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक और वित्त पोषण में 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का प्रतिनिधित्व करते हैं. इनमें शामिल हैं–

उन्नत भूजल प्रबंधन के माध्यम से भारत का जलवायु लचीलापन बनाने की वित्तीय प्रतिबद्धता. 

नाइजर बेसिन ने  (9 अफ्रीकी देश शामिल हैं) जलवायु परिवर्तन में लचीलापन को मजबूत बनाने के लिए दस वर्ष का निवेश योजना शुरु किया. इसके लिए विश्व बैंक/ आईडीए, डब्ल्यूएईएमयू, केएफडब्ल्यू, जीईएफ और इन देशों ने खुद वित्तीय समर्थन दिया है. 

जॉर्डन, लेबनान, मोनाको, मोरक्को, स्पेन और ट्युनीशिया में 7 वर्षीय भूमध्यसागीय जल मंच के तहत प्रतिबद्धता की गई है ताकि जल संसाधनों की स्थिति और प्रकृति को समझा जा सके. इसे यूरोपीय आयोग का समर्थन प्राप्त है. 

पेरू, इक्वाडोर, ब्राजील और कोलंबिया में इकोक्युएनकास, यूरोपीय आयोग द्वारा समर्थित नदी घाटियों में जलवायु परिवर्तन के अनुकूलन के लिए वित्तीय तंत्र की 3 वर्ष की प्रतिबद्धता. 

चीन में फ्रांस समर्थित हाई नदी घाटी में प्रंबधन में सुधार के लिए  3 वर्ष की प्रतिबद्धता.

मध्य अफ्रीका में कांगो बेसिन में, हाइड्रोलॉजिकल और मेट्रोलॉजिकल निगरानी कार्यक्रम की शुरुआत ताकि 160 मिलियन से अधिक नागरिकों को लाभ मिल सके.

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