सामाजिक न्याय और आधिकारिता मंत्री थावर चन्द्र गहलोत ने 8 सितम्बर 2015 को कानपुर में कृत्रिम अंग बनाने की सस्ती और आधुनिक सुविधा का उद्घाटन किया.
इस परियोजना की अनुमानित लागत 6 करोड़ रुपए है.
प्रधानमंत्री की मेक इन इंडिया पहल के अंतर्गत भारत का कृत्रिम अंग निर्माण निगम (एएलआईएमसीओ) सामाजिक न्याय और आधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत कार्य कर रहा है.
इस निगम ने देश में विकलांग व्यक्तियों के लिए सस्ते दामों पर कृत्रिम अंग बनाने के लिए प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण तथा तकनीकी और परामर्श सेवा के सम्बन्ध में बहुराष्ट्रीय कम्पनी ऑटोबोक के साथ समझौता किया है.
इस नई उत्पादन इकाई के साथ एएलआईएमसीओ तकनीकी दृष्टि से आधुनिक कृत्रिम प्रणाली बना सकेगा जिससे समाज के सभी वर्गों के ऐसे व्यक्तियों की निर्भरता कम हो सकेगी जिनका कोई अंग खराब है.
विकलांग व्यक्तियों को मुफ्त सहायक उपकरण प्रदान करने के कार्य में लगातार लगे कानपुर के एएलआईएमसीओ ने कानपुर देहात जिले में एक अन्यर सफल शिविर लगाया.
केन्द्रीय मंत्री थावर चन्द्र गहलोत ने विभिन्न प्रकार की विकलांगता से ग्रसित 692 व्यक्तियों को कृत्रिम अंग वितरित किए.
उन्हें सरकार की एडीआईपी योजना के अंतर्गत 60 लाख रुपए मूल्य से अधिक के सहायक उपकरण तथा कृत्रिम अंग प्रदान किए गए.
इस परियोजना की अनुमानित लागत 6 करोड़ रुपए है.
प्रधानमंत्री की मेक इन इंडिया पहल के अंतर्गत भारत का कृत्रिम अंग निर्माण निगम (एएलआईएमसीओ) सामाजिक न्याय और आधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत कार्य कर रहा है.
इस निगम ने देश में विकलांग व्यक्तियों के लिए सस्ते दामों पर कृत्रिम अंग बनाने के लिए प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण तथा तकनीकी और परामर्श सेवा के सम्बन्ध में बहुराष्ट्रीय कम्पनी ऑटोबोक के साथ समझौता किया है.
इस नई उत्पादन इकाई के साथ एएलआईएमसीओ तकनीकी दृष्टि से आधुनिक कृत्रिम प्रणाली बना सकेगा जिससे समाज के सभी वर्गों के ऐसे व्यक्तियों की निर्भरता कम हो सकेगी जिनका कोई अंग खराब है.
विकलांग व्यक्तियों को मुफ्त सहायक उपकरण प्रदान करने के कार्य में लगातार लगे कानपुर के एएलआईएमसीओ ने कानपुर देहात जिले में एक अन्यर सफल शिविर लगाया.
केन्द्रीय मंत्री थावर चन्द्र गहलोत ने विभिन्न प्रकार की विकलांगता से ग्रसित 692 व्यक्तियों को कृत्रिम अंग वितरित किए.
उन्हें सरकार की एडीआईपी योजना के अंतर्गत 60 लाख रुपए मूल्य से अधिक के सहायक उपकरण तथा कृत्रिम अंग प्रदान किए गए.
80 प्रतिशत से अधिक विकलांगता वाले विशेष रूप से पहचाने गए 20 व्यतक्तियों को बैटरी से चलने वाली मोटरयुक्त तिपहिया साइकिलें दी गई, जिनमें यूटीलिटी बॉक्स लगा है. प्रत्येक की कीमत 37000 रुपए है.
इस कार्यक्रम के तहत अधिकतर खर्चा मंत्रालय उठाएगा और 2.4 लाख रुपये की राशि स्थानीय सांसद देवेन्द्र सिंह भोले ने एमपी लैड फंड का इस्तेमाल करते हुए प्रदान की.
पहले से पहचाने गए विकलांग व्यक्तियों को विभिन्न सहायक उपकरण दिए गए जिनमें 550 तिपहिया साइकलें, 26 व्हींल चेयर, 596 क्रचेज (एक्सी्ला और एल-बो), चलने के लिए 93 छडि़यां, एक रोलेटर, आठ ब्रेल छडि़यां (मुड़ने वाली), 42 कानों के पीछे लगाने वाली डिजीटल हियरिंग एड मशीनें और विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए 2 एमएसआईईडी किट शामिल हैं.
शिविर में 26 कृत्रिम और आर्थोटिक्सि उपकरण भी वितरित किए गए.
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