मुम्बई ने 1 सितंबर 2015 को अखिल भारतीय प्रतिस्पर्धा में बुची बाबू मेमोरियल क्रिकेट ट्रॉफी जीती. चेन्नई में खेले गये फाइनल मुकाबले में मुंबई ने तमिलनाडु क्रिकेट एसोसिएशन डिस्ट्रिक्स (टीएनसीए) इलेवन को छह विकेट से हराया.
टीएनसीए ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 74 ओवर में 163 रन बनाये, इसके जवाब में मुंबई ने 45.2 ओवर में 166 रन बनाये.
मुंबई के सूर्या कुमार यादव को मैन ऑफ़ द सीरीज़ घोषित किया गया.
बुची बाबू मेमोरियल ट्रॉफी
यह एक वार्षिक टूर्नामेंट है जिसे मोथावारापू बुची बाबू के सम्मान में आरंभ किया गया है.
बुची बाबू का जन्म 1868 में हुआ था, वे एक समाजसेवी तथा क्रिकेट प्रेमी थे जिन्होंने देश में क्रिकेट क्लब की शुरुआत की थी. उन्हें “दक्षिण भारत में क्रिकेट का जनक” कहा जाता है. उन्होंने मद्रास प्रेसीडेंसी मैचों की शुरुआत की, पहला मैच उनके निधन के कुछ समय बाद खेला गया.
टीएनसीए ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 74 ओवर में 163 रन बनाये, इसके जवाब में मुंबई ने 45.2 ओवर में 166 रन बनाये.
मुंबई के सूर्या कुमार यादव को मैन ऑफ़ द सीरीज़ घोषित किया गया.
बुची बाबू मेमोरियल ट्रॉफी
यह एक वार्षिक टूर्नामेंट है जिसे मोथावारापू बुची बाबू के सम्मान में आरंभ किया गया है.
बुची बाबू का जन्म 1868 में हुआ था, वे एक समाजसेवी तथा क्रिकेट प्रेमी थे जिन्होंने देश में क्रिकेट क्लब की शुरुआत की थी. उन्हें “दक्षिण भारत में क्रिकेट का जनक” कहा जाता है. उन्होंने मद्रास प्रेसीडेंसी मैचों की शुरुआत की, पहला मैच उनके निधन के कुछ समय बाद खेला गया.
तमिलनाडु के दो व्यक्ति, एम बलिया एवं सी रामास्वामी भारतीय क्रिकेट टीम में खेल चुके हैं.
उन्होंने उन नियमों का विरोध किया था जिसमें भारतीयों को क्रिकेट खेलने की इज़ाज़त नहीं दी जाती थी. उनके प्रयासों द्वारा ही रंजीतसिंह जी को मद्रास लाया जा सका तथा चारी को इंग्लैंड भेजने में सफलता प्राप्त हुई. बुची बाबू मेमोरियल टूर्नामेंट अब भारत में एक प्रसिद्ध खेल बन चुका है जिसमे देश की नामी-गिरामी टीमें भाग लेती हैं.
उन्होंने उन नियमों का विरोध किया था जिसमें भारतीयों को क्रिकेट खेलने की इज़ाज़त नहीं दी जाती थी. उनके प्रयासों द्वारा ही रंजीतसिंह जी को मद्रास लाया जा सका तथा चारी को इंग्लैंड भेजने में सफलता प्राप्त हुई. बुची बाबू मेमोरियल टूर्नामेंट अब भारत में एक प्रसिद्ध खेल बन चुका है जिसमे देश की नामी-गिरामी टीमें भाग लेती हैं.
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