बेंगलुरु की सबसे बड़ी झील, बेलान्दुर जून 2015 के पहले सप्ताह में चर्चा में रही
क्योंकि भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) के कुछ शोधकर्ताओं ने पाया कि 16
मई 2015 को बेलान्दुर झील के पानी पर लगी आग
दूषित औद्योगिक प्रवाह के कारण थी.
इस शोध के निष्कर्षों को एक रिपोर्ट में प्रकाशित किया गया जिसका शीर्षक है, पथेटिक स्टेटस ऑफ वेटलैंड्स इन बेंगलुरु: एपिटोम ऑफ़ इनएफीशिएंट एंड अनकोरडीनेटेड गवर्नेंस (बेंगलुरू में झीलों की दयनीय स्थिति: अक्षम और बेबुनियाद शासन का प्रतीक).
इस शोध के निष्कर्षों को एक रिपोर्ट में प्रकाशित किया गया जिसका शीर्षक है, पथेटिक स्टेटस ऑफ वेटलैंड्स इन बेंगलुरु: एपिटोम ऑफ़ इनएफीशिएंट एंड अनकोरडीनेटेड गवर्नेंस (बेंगलुरू में झीलों की दयनीय स्थिति: अक्षम और बेबुनियाद शासन का प्रतीक).
इस शोध का अध्ययन पारिस्थितिकी विज्ञान केंद्र के पर्यावरण वैज्ञानिक प्रोफेसर वी रामचंद्र के नेतृत्व में किया गया.
इस शोध में पाया गया कि औद्योगिक इकाईयों में बनने वाले डिटर्जेंट में फॉस्फोरस की मौजूदगी होती है जिससे फेक्ट्रियों से निष्कासित प्रवाह द्वारा पानी पर फोम का निर्माण होता है जो आग का कारण बनता है.
बेलान्दुर के अतिरिक्त वार्थुर झील पर भी शोध किया गया जिससे यह साबित हुआ कि इन झीलों का पानी सिंचाई तथा घरेलू उपयोग के लिए हानिकारक है. शोध में यह भी पाया गया कि इससे भू-जल दूषित होने के आसार हैं. शोध में यह सुझाव दिया गया कि यह फोम बेंगलुरु की नदियों तथा झीलों के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है.
फोम
फोम कार्बनिक तथा अकार्बनिक तत्वों से मिलकर बना है जिसमें विभिन्न पदार्थ जैसे (नाइट्रोजन, फास्फोरस और कार्बन) एवं कैशन (सोडियम, पोटेशियम, कैल्शियम और मैग्नीशियम) शामिल हैं.
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