उत्तरी श्रीलंका में 18 किलोमीटर
लंबी जाफना–कनकसंथुरई रेल ट्रैक का उद्घाटन श्रीलंका के
परिवहन मंत्री कुमार वेलगामा ने 2 जनवरी 2015 को किया.
18 किलोमीटर लंबे इस वाणिज्यिक रेल सेवा को
फिर से बहाल करने का काम भारतीय रेल निर्माण कंपनी (इरकॉन) ने किया.
इस ट्रैक पर दो क्रॉसिंग स्टेशन हैं– कोंडावली और चुन्नाकम. साथ ही इसपर पांच हॉल्ट स्टेशन भी हैं– कोकुविल, इनुविल, मल्लाकम,
तेल्लीपलई और मविट्टापुरम.
यह रेल ट्रैक कोलंबो और कनकसेथुरई को जोड़ता है जो वर्ष 2009
में तमिल टाइगर्स से मुक्त कराए गए उच्च सुरक्षा जोन से होकर गुजरता
है.
252 किलोमीटर लंबी रेलवे ट्रैक को पूरा
करने का काम इरकॉन श्रीलंका रेलवे के साथ मिलकर चार सेग्मेंट में करेगा. इसमें से
तीन सेग्मेंट पूरा हो चुका है और उसपर रेल का परिचालन शुरु हो गया है. चौथा
सेग्मेंट मार्च 2015 तक पूरा हो जाएगा. 215 किलोमीटर लंबे ट्रैक के लिए पूरा हो चुके तीन सेग्मेंट में शामिल है–
• ओमनथई से जाफना– 129 किलोमीटर
• मेडावाच्छिया से तिरुकेथिस्वरम– 69 किलोमीटर
• जाफना से कनकसेथुरई– 18 किलोमीटर
• मेडावाच्छिया से तिरुकेथिस्वरम– 69 किलोमीटर
• जाफना से कनकसेथुरई– 18 किलोमीटर
चौथे सेग्मेंट में तिरुकेथिस्वरम और तालाईमन्नार पीयर के बीच
37 किलोमीटर की दूरी को कवर किया जाएगा.
भारत इस मार्ग पर 252 किलोमीटर
लंबी रेल मार्ग का निर्माण 800 मिलियन अमेरिकी डॉलर का ऋण दे
कर कर रहा है. 1980 के दशक के आखिर में, कोलंबो और उत्तर के बीच बनी पूरी रेल लाइन को लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल इलम
(एलटीटीई) ने लंबे समय तक चले जातीय युद्ध के दौरान नष्ट कर दिया था.
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