केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने वुमेन एंड मेन इन इंडिया 2014 रिपोर्ट जारी की-(10-NOV-2014) C.A

| Monday, November 10, 2014
केंद्रीय सांख्यिकीय कार्यालय ने 02 नवंबर 2014 को वुमेन एंड मेन इन इंडिया 2014 नाम की रिपोर्ट जारी की.
जनसंख्या और संबंधित आंकड़े
•    2011 की जनगणना के अनुसार भारत की आबादी 121 करोड़ से भी अधिक है. इसमें 48.5 फीसदी महिलाएं हैं जिसका अर्थ है कि ग्रामीण भारत में प्रति 1000 पुरुषों पर 949 महिलाएं है जबकि शहरी भारत में महिलाओं की संख्या प्रति 1000 पुरुषों पर 929 ही है.
•    केरल, पुड्डुचेरी, मणिपुर, गोवा और छत्तिगढ़ में महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक है जबकि दमन और दीव और चंडीगढ़ में प्रति 100 पुरुष के मुकाबले महिलाओं की संख्या 80 से भी कम है.
•    बालिकाओं (0–19 वर्ष) के लिए लिंगानुपात सबसे कम है लेकिन 60+ आयु वर्ग में 100 पुरुषों पर 103 महिलाओं का आंकड़ा एक बड़ी आबादी का आर्थिक गतिविधियों के लिए खतरे का संकेत देता है.
•    आर्थिक तौर पर सक्रिए आयु वर्ग (15–59) में प्रति 100 पुरुषों पर 94 महिलाएं हैं. 2012 में लिंगानुपात 908 था जिसमें पिछले वर्ष की तुलना में मामूली रूप से कमी आई थी.
•    साल 2012 में महिलाओं के विवाह की औसत आयु 21.2 वर्ष थी. शहरी औसत आयु 22.4 वर्ष और ग्रामीण औसत आयु 20.8 वर्ष थी.
•    राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (2011–12) के 68वें राउंड के मुताबिक, ग्रामीण इलाके के कुल 1.5 फीसदी और शहरी इलाके के 12.4 फीसदी परिवारों में जहां महिलाएं परिवार की प्रमुख थी. 1993– 94 में यही आंकड़ा ग्रामीण इलाके के लिए 9.7 फीसदी और शहरी इलाके के लिए 10.6 फीसदी था. 

स्वास्थ्य
•    समय से पहले जन्मे बच्चों की जन्म दर (क्रूड बर्थ रेट) में 2011 में 21.8 थी. इसमें कमी हुई और 2012 में यह 21.6 हो गई. सामान्य प्रजनन दर (जेनरल फर्टिलिटी रेटजीएफआर) में भी कमी दर्ज की गई. साल 2011 के 81.2 के मुकाबले यह 2012 में 80.3 रही.
•    कुल प्रजनन दर (टोटल फर्टिलिटी रेटटीएफआर) में भी कमी हुई और 2011 के 2.8 के मुकाबले यह 2012 में 2.2 रही.
•     उम्र विशेष प्रजनन दर 20– 24 आयुवर्ग (191.9) की महिलाओं में सबसे अधिक थी. इसके बाद 25– 29 आयु वर्ग की महिलाओं  (154.6) का स्थान है और फिर 30– 34 वर्ष (64.5)  वाली आयु वर्ग की महिलाओं का स्थान आता है.
•    महिला शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) पुरुष शिशु मृत्यु दर– 39 की तुलना में 42 थी और 2013 में समग्र आईएमआर 40 था.
•    आईएमआर में काफी हद तक कमी आई. साल 2003 में जहां यह 60 था वहीं 2013 में 40 हो गया. इससे यह पता चलता है कि शिशुओं की स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार हुआ है. प्रमुख राज्यों में सबसे अधिक आईएमआर मध्य प्रदेश में दर्ज किया गया जबकि गोवा में सबसे कम आईएमआर दर्ज हुआ.
•    आयु वर्ग 10–14 वर्ष में पुरुषों और महिलाओँ के लिए मृत्यु दर सबसे कम है लेकिन महिला मृत्यु दर अभी भी कम है, यह पुरुषों के 0.8 की तुलना में 0.6 है. साल 2012 में सभी उम्र की महिलाओं के बीच मृत्यु दर 6.4 थी जबकि पुरुषों की मृत्यु दर 7.7.
•    साल 2010–12 मातृत्व मृत्यु अनुपात (एमएमआर) साल 1999– 2001 के 327 की तुलना में कम होकर 178 रह गई, इसमें बड़ा योगदान शायद सरकार की मातृत्व एवं शिशु योजनाओं और संस्थागत जन्मों का है. राज्यों में सबसे अधिक एमएमआर असम (328) और सबसे कम तमिलनाडु (90) में दर्ज किया गया.
साक्षरता और शिक्षा
•    साल 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत की साक्षरता दर 2001 की तुलना में 14 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 74.04 फीसदी थी, पिछले दशक में इसमें सबसे अधिक बढ़ोतरी ग्रामीण महिलाओं (26 फीसदी) में दर्ज की गई.  2011 की जनगणना के अनुसार महिला साक्षरता स्तर 65.46 फीसदी था जबकि पुरुष साक्षरता की दर 80 फीसदी से भी अधिक थी.
•    94 फीसदी की साक्षरता दर के साथ केरल सबसे अधिक साक्षरता वाला राज्य रहा जबकि 63.82 फीसदी की साक्षरता दर के साथ बिहार सबसे कम साक्षर राज्य रहा.
•    15 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुष युवाओं में साक्षरता दर में 73.4 से इजाफा हुआ और वह 78.8 हो गया जबकि युवा महिलाओं में साक्षरता में अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई. यह 2001 के 47.8 से 2011में 59.3 पर पहुंच गया. दशकों से समग्र व्यस्क साक्षरता में बढ़ोतरी हुई है.
•    साथ 2013– 14 में प्राथमिक स्तर के स्कूलों में पुरुषों के सकल नामांकन अनुपात (जीईआर)  100.20 की तुलना में महिलाओं की जीईआर 102.65 रहा.
•    साल 2013– 14 में प्राथमिक कक्षाओं में प्रति 100 लड़कों पर 93, माध्यिमक (मिडिल) कक्षाओं में 95 और माध्यमिक (सेकेंडरी) कक्षाओं में 90 लड़कियां थीं.
•    कक्षा 1– 5  में स्कूल बीच में ही छोड़ने वाले बच्चों की दर (ड्रॉप आउट रेट) बालिकाओं और बालकों के लिए क्रमशः 4.66 और 4.68 एवं कक्षा 1–7 में ड्रॉपआउट होने वाले बच्चों (बालिकाओं और बालकों के लिए) की दर क्रमशः 4.01 और 2.3 थी.
अर्थव्यवस्था में भागीदारी
•    2011 की जनगणना के अनुसार, पुरुषों के 53.26 फीसदी के कार्यबल भागीदारी की तुलना में महिलाओं की कार्यबल भागीदारी 25.51 फीसदी थी. शहरी इलाकों में 53.03 फीसदी के पुरुषों के मुकाबले ग्रामीण क्षेत्र में बेहतर महिला कार्यबल भागीदारी दर (30.02 फीदसी) रही.
•    मुख्य और सीमांत महिला श्रमिकों में से 41.1 फीसदी कृषि श्रमिक हैं, 24.0 फीसदी किसान, 5.7 फीसदी घरेलू उद्योग श्रमिक और 29.2 फीसदी अन्य कार्यों में संलिप्त हैं.
•    राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (68वां राउंड) के परिणाम इस बात की ओर इशारा करते हैं कि 2011– 2012 में ग्रामीण क्षेत्र में महिला श्रमिकों की आबादी का अनुपात 24.8 था जबकि पुरुषों का 54.3
•    साल 2011 में सिर्फ 20.5 फीसदी महिलाएं ही संगठित क्षेत्र में काम कर रही थीं. इनमें से 18.1फीसदी सार्वजनिक क्षेत्र में और 24.3 फीसदी निजी क्षेत्र में काम कर रही थीं.
•    2011–12 के दौरान सक्रिय आयु वर्ग के नियमित मजदूरी/ वेतनभोगी कर्मचारियों को मिलने वाली मजदूरी/ वेतन ग्रामीण इलाके में महिलाओं को दैनिक 428.6 रुपये और पुरुषों के दैनिक 550.23 रुपये थे. शहरी इलाके के लिए यही आंकड़ा महिलाओं के लिए दैनिक 609.7 रुपये और पुरुषों के लिए 805.52 रुपये दैनिक था.
फैसला करने (डिसीजन मेकिंग) में भागीदारी
•    साल 2014 में केंद्रीय मंत्री परिषद के 45 मंत्री पदों में से सिर्फ 7 पदों पर महिलाएं थी, जो कि साल 2004 के करीब 10 फीसदी के मुकाबले थोड़ा सा ही अधिक (15 फीसदी) है. साल 2014 के चुनावों में 62 महिलाएं निर्वाचित हुईं और लोकसभा में इनकी हिस्सेदारी एक फीसदी से थोड़ी अधिक है.
•    पंद्रहवें आम चुनावों में महिलाओं की भागीदारी 6 फीसदी बढ़ी और यह कुल मतदान का 56 फीसदी रही. इसी अवधि में पुरुषों की भागीदारी 60 फीसदी से बढ़कर 67 फीसदी हो गई.
•    राज्यों की विधानसभाओं में महिलाएं सिर्फ 8 फीसदी और राज्य परिषदों में 4 फीसदी की हिस्सेदारी रखती हैं.
•    पंचायतों में कुल 46.7 फीसदी महिलाएं हैं. 1 मार्च 2013 की स्थिति के अनुसार सबसे अधिक महिलाएं झारखंड में (58.6 सदी) और सबसे कम गोवा में (32.2 फीसदी) हैं.
•    सुप्रीम कोर्ट के 30 जजों में सिर्फ दो महिला जज हैं और विभिन्न उच्च न्यायालयों के 609 जजों में सिर्फ 58 महिला जज हैं. दिल्ली उच्च न्यायालय में सबसे अधिक 25 फीसदी महिला जज हैं.
•    अखिल भारतीय और केंद्रीय समूह ए सेवाओं में भारतीय आर्थिक सेवा में 30 फीसदी महिलाएं हैं और भारतीय व्यापार सेवा में सिर्फ 12 फीसदी महिलाएं.
महिला सशक्तिकरण में सामाजिक बाधाएं
•    पति और रिश्तेदारों की निर्दयता की भागीदारी अभी भी सबसे अधिक बनी हुई है. इसके बाद महिलाओं पर बलात्कार की होने वाली घटनाओं का स्थान है. महिलाओं के साथ अश्लीलता के  मामलों की रिपोर्टिंग में साल 2012 के मुकाबले 2013 में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है.
•    50 वर्ष से अधिक उम्र समूह में बलात्कार की शिकार महिलाओं की संख्या में 90 फीसदी का इजाफा हुआ है जबकि 10 वर्ष से कम उम्र समूह की सभी बलात्कार पीड़ितों में 5फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया है. साल 2013 में बलात्कार के 13 फीसदी  मामले मध्य प्रदेश में दर्ज किए गए और 2013 मे भारत में कुल बलात्कार पीड़ितों का 46 फीसदी 18–30 वर्ष के उम्र समूह का था.
महिलाओं में आत्महत्या की दर पुरुषों की तुलना में लगभग आधी है और पिछले दस वर्षों में आत्महत्या की दर में बहुत अधिक बदलाव नहीं देखा गया है.


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