भारत और भूटान ने बिहार में नालंदा विश्वविद्यालय को
उत्कृष्ट अंतरराष्ट्रीय केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए 7 नवंबर 2014 को सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए.
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और भूटान नरेश ने थिम्पू में इस संबंध में सहमतिपत्र पर
हस्ताक्षर किये. भारत के राष्ट्रपति भूटान की दो दिवसीय यात्रा पर गए थे. पिछले 26
वर्षों में किसी भारतीय राष्ट्राध्यक्ष की यह पहली भूटान यात्रा है.
सहमति पत्र की मुख्य विशेषताएं
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सहमति पत्र के अनुसार अंतरराष्ट्रीय
संस्था के रूप में नालंदा विश्वविद्यालय के उद्देश्यों और कार्यों में लिंग, जाति, धर्म, विकलांगता,
नस्ल या सामाजिक, आर्थिक पृष्ठभूमि की परवाह
किए बगैर एक साथ सभी देशों से प्रतिभाशाली और समर्पित छात्रों को शिक्षा देना
सर्वोपरि लक्ष्य होगा.
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समझौते के अनुसार, नालंदा विश्वविद्यालय बिहार में राजगीर में स्थापित किया जाएगा और डिग्री,
डिप्लोमा और प्रमाण पत्र प्रदान करने में समर्थ होगा.
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यहाँ शिक्षा एशियाई समुदाय को
विकसित करने पर केंद्रित होगी. जहाँ हर छात्र की बौद्धिक क्षमता को विकसित किया जा
सकेगा.
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समझौते के अनुसार, भारत अध्ययन या विश्वविद्यालय में काम करने हेतु भारत की यात्रा के लिए
छात्रों, संकाय और स्टाफ के लिए उपयुक्त वीजा प्रदान करेगा.
विश्वविद्यालय की स्थापना और संचालन के लिए धन का प्रबंध स्वैच्छिक दान के आधार पर
किया जाएगा.
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