प्रथम चीन– जापानी युद्ध ( 1 अगस्त
1894-17 अप्रैल 1895) के दौरान 120
वर्ष पहले डूबे चीनी जहाज का मलबा नवंबर 2014 के
पहले सप्ताह में खोज निकाला गया.
फिलहाल इस मलबे को डैंडोंग नं. 1 का कोड दिया गया है, यह पीले सागर में बंदरगाह निर्माण के लिए पानी के नीचे पर्यवेक्षण के दौरान मिला और यह डैंडोंग बंदरगाह से दक्षिण-पश्चिम में 10 नॉटिकल मील पर स्थित है.
फिलहाल इस मलबे को डैंडोंग नं. 1 का कोड दिया गया है, यह पीले सागर में बंदरगाह निर्माण के लिए पानी के नीचे पर्यवेक्षण के दौरान मिला और यह डैंडोंग बंदरगाह से दक्षिण-पश्चिम में 10 नॉटिकल मील पर स्थित है.
युद्धपोत का 50 मीटर उंचा ढांचा अभी भी बरकार है लेकिन
इसे अंदर की हालत बहुत बुरी है.
खोजा गया पोत 1600 टन वजनी है. यह क्विंग राजवंश के शाही बलों बीयांग बेड़े के चार युद्धपोतों में से एक था. जापान की नौसेना ने 17 सितंबर 1894 को पीले सागर के युद्ध में क्विंग राजवंश के शाही बलों को हराया था.
हालांकि, आग की वजह से बुरी तरह टूट चुके और डूबने की स्थिति में आ जाने के बाद भी जहाज के कप्तान डींग शीचांग जहाज– झींयुआन को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हुए थे. इसी वजह से पिछले 100 वर्षों से डेंग शीचांग चीन में देशभक्ति का प्रतीक माने जाते रहे हैं.
प्रथम चीन– जापान युद्ध
पहला चीन– जापान युद्ध क्विंग राजवंश चीन और मुख्य रुप से कोरिया के नियंत्रण वाला मीजी जापान के बीच 1 अगस्त 1894- 17 अप्रैल 1895 के दौरान लड़ा गया था. यह युद्ध शिमोन्से की संधि पर हस्ताक्षर करने के बाद 17 अप्रैल 1895 को समाप्त हुआ था.
शिमोन्से की संधि के तहत चीन ने कोरिया के पूर्ण स्वतंत्रा को मान्यता दी और जापान के लिए लियाओडोंग प्रायद्वीप (वर्तमान में लिओनिंग प्रांत के दक्षिण में), ताइवान और पेंघु द्वीप को सौंप दिया. विवादित सेनकाकू/डियाओयू द्वीप संधि में नहीं थे लेकिन जापान ने 1895 में ओकिनावा प्रांत के लिए इन निर्जन द्वीपों पर कब्जा कर लिया था.
खोजा गया पोत 1600 टन वजनी है. यह क्विंग राजवंश के शाही बलों बीयांग बेड़े के चार युद्धपोतों में से एक था. जापान की नौसेना ने 17 सितंबर 1894 को पीले सागर के युद्ध में क्विंग राजवंश के शाही बलों को हराया था.
हालांकि, आग की वजह से बुरी तरह टूट चुके और डूबने की स्थिति में आ जाने के बाद भी जहाज के कप्तान डींग शीचांग जहाज– झींयुआन को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हुए थे. इसी वजह से पिछले 100 वर्षों से डेंग शीचांग चीन में देशभक्ति का प्रतीक माने जाते रहे हैं.
प्रथम चीन– जापान युद्ध
पहला चीन– जापान युद्ध क्विंग राजवंश चीन और मुख्य रुप से कोरिया के नियंत्रण वाला मीजी जापान के बीच 1 अगस्त 1894- 17 अप्रैल 1895 के दौरान लड़ा गया था. यह युद्ध शिमोन्से की संधि पर हस्ताक्षर करने के बाद 17 अप्रैल 1895 को समाप्त हुआ था.
शिमोन्से की संधि के तहत चीन ने कोरिया के पूर्ण स्वतंत्रा को मान्यता दी और जापान के लिए लियाओडोंग प्रायद्वीप (वर्तमान में लिओनिंग प्रांत के दक्षिण में), ताइवान और पेंघु द्वीप को सौंप दिया. विवादित सेनकाकू/डियाओयू द्वीप संधि में नहीं थे लेकिन जापान ने 1895 में ओकिनावा प्रांत के लिए इन निर्जन द्वीपों पर कब्जा कर लिया था.
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