ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री टोनी एबोट की दो दिवसीय भारत की राजकीय
यात्रा 4-5 सितंबर 2014 को
संपन्न हो गई. इस यात्रा के दौरान दोनों नेताओं ने असैन्य परमाणु ऊर्जा समझौता
सहित चार समझौते पर नई दिल्ली में हस्ताक्षर किए. प्रधानमंत्री टोनी एबोट ने
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय, क्ष्ोत्रीय
और आपसी हितों के मामलों पर चर्चा की. अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री एबोट ने
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी से भेंट की.
प्रधानमंत्री एबोट ने मुम्बई का भी दौरा किया जहां उन्होंने भारतीय उद्योगपतियों
से मुलाकात की.
दोनों प्रधानमंत्रियों की उपस्थिति में निम्नलिखित द्विपक्षीय
समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए.
• परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग में सहयोग.
• खेलों में सहयोग पर समझौता ज्ञापन.
• जल संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में सहयोग पर समझौत ज्ञापन का नवीकरण.
• तकनीकी व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण (टीवीईटी) में सहयोग पर समझौता ज्ञापन.
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच असैन्य परमाणु ऊर्जा समझौते पर हस्ताक्षर होने के साथ ही ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम आयात करने का मार्ग प्रशस्त हो गया. यह परमाणु समझौता भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है.
वर्ष 2008 में भारत-अमेरिकी सिविल एटमी करार के बाद ऑस्ट्रेलिया ने भारत को यूरेनियम की बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंध को हटा लिया था ताकि भारत की महत्वाकांक्षी परमाणु कार्यक्रम की जरूरत पूरी हो सके. उसके बाद से इस परमाणु समझौते पर वर्ष 2012 से हस्ताक्षर करने के प्रयास किये जा रहे थे. ऑस्ट्रेलिया द्वारा यह प्रतिबंध भारत द्वारा परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर न किये जाने के कारण लगाए गए थे.
इस करार का उद्देश्य परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देना है. इस समझौते में यह स्वीकार किया गया कि भारत सतत विकास और अपनी ऊर्जा सुरक्षा की जरूरत को पूरा करने के लिए परमाणु ऊर्जा का इस्तेमाल करेगा और इसको लेकर प्रतिबद्ध है. भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए समझौते में कहा गया है, ‘ऑस्ट्रेलिया भारत को यूरेनियम की दीर्घकालीन आपूर्ति की भूमिका निभा सकता है. इसके तहत यूरेनियम की आपूर्ति, रेडियो आइसोटेप्स का उत्पादन, परमाणु सुरक्षा और सहयोग के दूसरे क्षेत्रों में सहयोग करना है.
• परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग में सहयोग.
• खेलों में सहयोग पर समझौता ज्ञापन.
• जल संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में सहयोग पर समझौत ज्ञापन का नवीकरण.
• तकनीकी व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण (टीवीईटी) में सहयोग पर समझौता ज्ञापन.
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच असैन्य परमाणु ऊर्जा समझौते पर हस्ताक्षर होने के साथ ही ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम आयात करने का मार्ग प्रशस्त हो गया. यह परमाणु समझौता भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है.
वर्ष 2008 में भारत-अमेरिकी सिविल एटमी करार के बाद ऑस्ट्रेलिया ने भारत को यूरेनियम की बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंध को हटा लिया था ताकि भारत की महत्वाकांक्षी परमाणु कार्यक्रम की जरूरत पूरी हो सके. उसके बाद से इस परमाणु समझौते पर वर्ष 2012 से हस्ताक्षर करने के प्रयास किये जा रहे थे. ऑस्ट्रेलिया द्वारा यह प्रतिबंध भारत द्वारा परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर न किये जाने के कारण लगाए गए थे.
इस करार का उद्देश्य परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देना है. इस समझौते में यह स्वीकार किया गया कि भारत सतत विकास और अपनी ऊर्जा सुरक्षा की जरूरत को पूरा करने के लिए परमाणु ऊर्जा का इस्तेमाल करेगा और इसको लेकर प्रतिबद्ध है. भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए समझौते में कहा गया है, ‘ऑस्ट्रेलिया भारत को यूरेनियम की दीर्घकालीन आपूर्ति की भूमिका निभा सकता है. इसके तहत यूरेनियम की आपूर्ति, रेडियो आइसोटेप्स का उत्पादन, परमाणु सुरक्षा और सहयोग के दूसरे क्षेत्रों में सहयोग करना है.
इस समझौते की विशेष अहमियत है क्योंकि भारत के परमाणु संयंत्र करीब 4680
मेगावट बिजली पैदा करते हैं, जिसमें से 2840
मेगावाट का उत्पादन स्वदेशी यूरेनियम से होता है, जबकि 1840 मेगावाट का आयात किए हुए ईंधन से होता है.
देश के विकास में बिजली का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान हैं. बिना ऊर्जा के देश के विकास की कल्पना करना व्यर्थ है. इस समझौते से देश में कार्बन की मात्रा कम करने में मदद मिलेगी. क्योंकि भारत में बिजली उत्पादन में ज्यादातर कोयले का इस्तेमाल होता है.
भारत में यूरेनियम से बिजली का उत्पादन मात्र दो प्रतिशत है. ऐसे में भारत को परमाणु बिजली उत्पादन के लिए यूरेनियम की सख्त जरूरत है. इसके मिलने से भारत के परमाणु बिजलीघर अधिक उत्पादन कर सकेंगें.
यूरेनियम के भंडार के मामले में ऑस्ट्रेलिया दुनिया का तीसरा प्रमुख देश है और वह एकवर्ष में करीब 7,000 टन यूरेनियम का निर्यात करता है.
देश के विकास में बिजली का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान हैं. बिना ऊर्जा के देश के विकास की कल्पना करना व्यर्थ है. इस समझौते से देश में कार्बन की मात्रा कम करने में मदद मिलेगी. क्योंकि भारत में बिजली उत्पादन में ज्यादातर कोयले का इस्तेमाल होता है.
भारत में यूरेनियम से बिजली का उत्पादन मात्र दो प्रतिशत है. ऐसे में भारत को परमाणु बिजली उत्पादन के लिए यूरेनियम की सख्त जरूरत है. इसके मिलने से भारत के परमाणु बिजलीघर अधिक उत्पादन कर सकेंगें.
यूरेनियम के भंडार के मामले में ऑस्ट्रेलिया दुनिया का तीसरा प्रमुख देश है और वह एकवर्ष में करीब 7,000 टन यूरेनियम का निर्यात करता है.
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