आनुवंशिकीविद् प्रोफेसर सर एलेक जेफरी को वर्ष 1984 में डीएनए फिंगरप्रिंटिंग की खोज के लिए लंदन की रॉयल सोसायटी द्वारा
कोप्ले मेडल 2014 से सम्मानित किया गया. उन्हें मानव जीनोम
के परिवर्तन और उत्परिवर्तन में उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए पुरस्कार दिया गया.
सर एलेक जेफरी द्वारा डीएनए के साथ व्यक्तियों की पहचान की
विधि की खोज ने फोरेंसिक विभागों में पहचान और रक्त-संबंध के सबूतों को पता लगाने
में मदद की.
इस विधि का वर्ष 1985 में पहली बार आप्रवास विवाद को सुलझाने के लिए इस्तेमाल किया गया था. वर्ष 1987 में इसका वाणिज्यीकरण किया गया. तब तक सभी परीक्षण लीसेस्टर विश्वविद्यालय में प्रोफेसर जेफरी की प्रयोगशाला में किये जा रहे थे.
इस विधि का वर्ष 1985 में पहली बार आप्रवास विवाद को सुलझाने के लिए इस्तेमाल किया गया था. वर्ष 1987 में इसका वाणिज्यीकरण किया गया. तब तक सभी परीक्षण लीसेस्टर विश्वविद्यालय में प्रोफेसर जेफरी की प्रयोगशाला में किये जा रहे थे.
कोप्ले मेडल के बारे में
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लंदन की रॉयल सोसायटी ने वर्ष 1731 में पदक देने की शुरूआत की और यह विज्ञान का सबसे पुराना पुरस्कार माना
जाता है.
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वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए सर
अल्बर्ट आंइंसटाइन, चार्ल्स डार्विन, माइकल
फैराडे और स्टीफन हॉकिंग इस पुरस्कार के प्राप्तकर्ताओं में से एक थे.
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नोबल पुरस्कार विजेता भौतिक
विज्ञानी प्रोफेसर सर आंद्रे जिम को ग्राफीन के अग्रणी अनुसंधान के लिए वर्ष 2013 के पुरस्कार से सम्मानित किया गया.
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वर्ष 1976 में ब्रिटिश बायोकेमिस्ट डोरोथी हॉकिन इस पदक से सम्मानित होने वाली
एकमात्र महिला है.
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