ब्रिटेन के वैज्ञानिकों के एक समूह ने जुलाई 2014
के प्रथम सप्ताह में ‘रक्त जाँच’ के माध्यम से अल्जाइमर का पता लगाने की घोषणा की. यह घोषणा लंदन में की गई.
किंस कॉलेज (लंदन) के शोधकर्ताओं के समूह ने रक्त में पाए जाने वाले दस ऐसे प्रोटीनों का पता लगाया, जो अल्जाइमर बीमारी के शुरुआती चरण का अनुमान लगाने में मदद कर सकते हैं. चिकित्सकीय परीक्षणों में इसके नतीजे 87 प्रतिशत तक सटीक साबित हुए. शोधकर्ताओं ने 1148 मरीजों के ब्लड टेस्ट के जरिये बीमारी से जुड़े 26 प्रोटीनों पर का परीक्षण एवं विश्लेषण किया. इनमें से दस प्रोटीनों का संयोजन अल्जाइमर बीमारी के शुरुआती चरणों के संकेत देता है.
किंस कॉलेज (लंदन) के शोधकर्ताओं के समूह ने रक्त में पाए जाने वाले दस ऐसे प्रोटीनों का पता लगाया, जो अल्जाइमर बीमारी के शुरुआती चरण का अनुमान लगाने में मदद कर सकते हैं. चिकित्सकीय परीक्षणों में इसके नतीजे 87 प्रतिशत तक सटीक साबित हुए. शोधकर्ताओं ने 1148 मरीजों के ब्लड टेस्ट के जरिये बीमारी से जुड़े 26 प्रोटीनों पर का परीक्षण एवं विश्लेषण किया. इनमें से दस प्रोटीनों का संयोजन अल्जाइमर बीमारी के शुरुआती चरणों के संकेत देता है.
अल्जाइमर से संबंधित मुख्य तथ्य
अल्जाइमर (Alzheimer) एक प्रकार का रोग है, जिसमें पीड़ित व्यक्ति कोई भी
चीज जल्दी भूल जाता है. आम भाषा में इसे 'भूलने का रोग'
भी कहते हैं. इसका नाम ‘अलोइस अल्जाइमर’
नामक चिकित्सा विज्ञानी के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने सबसे पहले इस रोग से संबंधित विवरण दिया.
उच्च रक्तचाप, मधुमेह, आधुनिक जीवनशैली और सर में चोट लगने से इस बीमारी के होने की आशंका बढ़ जाती है. प्रायः 60 वर्ष की उम्र के आसपास इस बीमारी की आशंका अधिक होती है. इस बीमारी का फिलहाल कोई स्थायी इलाज नहीं है लेकिन रोग के शुरूआती दौर में नियमित जांच और इलाज से इस रोग पर काबू पाया जा सकता है.
उच्च रक्तचाप, मधुमेह, आधुनिक जीवनशैली और सर में चोट लगने से इस बीमारी के होने की आशंका बढ़ जाती है. प्रायः 60 वर्ष की उम्र के आसपास इस बीमारी की आशंका अधिक होती है. इस बीमारी का फिलहाल कोई स्थायी इलाज नहीं है लेकिन रोग के शुरूआती दौर में नियमित जांच और इलाज से इस रोग पर काबू पाया जा सकता है.
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