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क्या गवर्नर पद की गरिमा सरकारों ने कम की हैं? क्या बिना कारण बताए किसी राज्य के गवर्नर को बर्खास्त कर सकती हैं केंद्र
सरकार ?
हां, सरकार ने गवर्नर पद
की गरिमा को कम करने का काम किया है. जैसा की पिछले
कुछ समय से हम देख सकते है कि केंद्र में सरकार बदलने के साथ ही साथ राज्यों के
राज्यपाल बदले जाते रहे हैं, भले ही उनका कार्यकाल शेष हो.
केंद्र में नयी सरकार के सत्ता में आने के बाद, पिछली सत्तारूढ़ राजनीतिक दल द्वारा समर्थित राज्यपाल अपने पद से इस्तीफा
देते रहे हैं. इसी क्रम में, हाल ही में उत्तर प्रदेश के
राज्यपाल बीएल जोशी और छ्त्तीसगढ़ के राज्यपाल शेखर दत्त ने अपने पद से इस्तीफा दे
दिया.
इसके अतिरिक्त कई ऐसे उदाहरण देखने को मिलते हैं जबकि, केंद्र में सत्ताधारी पक्ष अपने मनपसंद लोगों को गवर्नर पद पर नियुक्त कर
अपना हित साधते हैं.
राज्यपाल की नियुक्ति का प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 155
में किया गया है. राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति के द्वारा की
जाती है. राज्य की कार्यपालिका का प्रमुख राज्यपाल होता है, जो
कि मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार कार्य करता है. इसकी नियुक्ति पांच वर्षों हेतु
की जाती है. इस कार्य अवधि में बिना किसी ‘विशेष कारण’
के राज्यपाल को उसके पद से नहीं हटाया जा सकता.
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