भारतीय रिजर्व बैंक ने दूसरा-द्विमासिक मौद्रिक नीति वक्तव्य 2014-15 जारी किया-(05-JUNE-2014) C.A

| Thursday, June 5, 2014
भारतीय रिजर्व बैंक (आईबीआई) ने 3 जून 2014 को दूसरा-द्विमासिक मौद्रिक नीति वक्तव्य 2014-15 जारी किया. आईबीआई ने अपने दूसरे द्विमासिक मौद्रिक नीति वक्तव्य में नीतिगत ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखा.
वर्तमान और उभरती हुई समष्टि आर्थिक स्थिति के आकलन के आधार पर यह निर्णय लिया गया है कि:
•    चलनिधि समायोजन सुविधा (एलएएफ) के अंतर्गत नीति रिपो दर में कोई परिवर्तन किए बिना इसे 8.0 प्रतिशत पर रखा जाए;
•    अनुसूचित बैंकों के नकदी आरक्षित अनुपात (सीआरआर) को अपरिवर्तित रखते हुए इसे निवल मांग और मीयादी देयताओं (एनडीटीएल) के 4.0 प्रतिशत पर रखा जाए;
•    अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के सांविधिक चलनिधि अनुपात (एसएलआर) को 50 आधार अंकों तक कम करते हुए 14 जून 2014 को शुरू होने वाले पखवाड़े से उनकी निवल मांग और मीयादी देयताओं के 23.0 प्रतिशत से घटाकर 22.5 प्रतिशत किया जाए;
•    निर्यात ऋण पुनर्वित्त (ईसीआर) सुविधा के अंतर्गत उपलब्धऔ कराई गई चलनिधि को पात्र निर्यात ऋण बकाए के 50 प्रतिशत से घटाकर तत्कारल प्रभाव से 32 प्रतिशत किया जाए;
•    तत्कााल प्रभाव से ईसीआर के अंतर्गत चलनिधि की पहुंच में कमी के लिए संपूर्ण प्रतिपूर्ति हेतु निवल मांग और मीयादी देयताओं के 0.25 प्रतिशत की एक विशेष मीयादी रिपो सुविधा लागू की जाए; और
•    बैंकिंग प्रणाली के निवल मांग और मीयादी देयताओं के 0.75 प्रतिशत तक 7-दिवसीय और 14-दिवसीय मीयादी रिपो के अंतर्गत चलनिधि उपलब्धम कराना जारी रखा जाए.
भारतीय समष्टिआर्थिक स्थिति का आकलन
यद्पि भारत में मुद्रास्फीति में कमी आयी है, फिर भी आरबीआई कई ऐसे कारकों को ध्यान में रखे हुए है जो कि मुद्रास्फीति को प्रेरित कर सकते हैं. इन कारकों में से एक है अल नीनो के कारण जून-सितंबर 2013 में कमजोर मानसून के कारण कम होना.
स्वर्ण आयात में कमीं के कारण वित्त वर्ष 2013-14 में भारत के चालू खाते का घाटा (सीएडी) सकल घरेलू उत्पाद का 1.7 प्रतिशत रह गया. हालांकि अन्य गैर-तिलहन आयात भी कमजोर घरेलू मांग के कारण कम रहा.
लगातार दो माह निर्यात में गिरावट के बाद अप्रैल 2014 में बढ़ोत्तरी एवं घट रही आयात मांग के कारण व्यापार घाटा भी घटा.
पोर्टफोलियो निवेश के कारण प्रत्यक्ष विदेशी निवेश तथा वाह्य वाणिज्यिक ऋण ने वाह्य वित्तीय परिस्थितियों को अनुकूल बनाये रखा और विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोत्तरी हुयी.
तीसरा-द्विमासिक मौद्रिक नीति वक्तव्य 5 अगस्त 2014 को जारी करना निर्धारित किया गया.


0 comments:

Post a Comment