दिल्ली देश का पहला केरोसिन (मिट्टी का तेल) मुक्त राज्य बना. इसकी
घोषणा दिल्ली राज्य सरकार ने 16 जून 2014 को की. दिल्ली ने यह उपलब्धि केरोसिन मुक्त शहर योजना के तहत प्राप्त की
जिसकी शुरुआत वर्ष 2012-13 में की गई थी.
दिल्ली राज्य सरकार ने इस योजना पर एक मुश्त 62 करोड़ रूपए खर्चकर दो लाख परिवारों को मुफ्त एलपीजी सिलेंडर, रेगुलेटर, गैस स्टोव, सुरक्षा ट्यूब और एलपीजी कनेक्शन मुहैया कराया.
दिल्ली राज्य सरकार ने इस योजना पर एक मुश्त 62 करोड़ रूपए खर्चकर दो लाख परिवारों को मुफ्त एलपीजी सिलेंडर, रेगुलेटर, गैस स्टोव, सुरक्षा ट्यूब और एलपीजी कनेक्शन मुहैया कराया.
केरोसिन मुक्त योजना 2012-13
दिल्ली को केरोसिन मुक्त राज्य बनाने के उद्देश्य से केरोसिन मुक्त योजना की शुरुआत केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और तीन प्रमुख पेट्रोलियम कंपनियों के सहयोग से 21 अगस्त 2012 को की गई थी.
केरोसिन मुक्त योजना 2012-13 के तहत दिल्ली राज्य सरकार ने कुल 62 करोड़ की धन राशि खर्च कर 2 लाख परिवारों को मुफ्त एलपीजी सिलेण्डर, रेग्युलेटर, गैस स्टोव, सुरक्षा टय़ूब और एलपीजी कनेक्शन मुहैया कराया है.
दिल्ली में प्रति वर्ष 53000 किलो लीटर केरोसिन का उपयोग किया जाता था. यह केरोसिन दिल्ली राज्य सरकार द्वारा जरूरतमंद परिवारों को 12.50 रूपए प्रति लीटर की दर से उपलब्ध कराया जाता था, जिसपर प्रति लीटर 15 रूपए की सब्सिडी केन्द्र सरकार द्वारा दी जाती थी और प्रत्येक वर्ष लगभग 200 करोड़ की धन राशि सब्सिडी के रूप में खर्च की जाती थी. दिल्ली को केरोसिन मुक्त बनाने से प्रति वर्ष खर्च होने वाले सब्सिडी की 200 करोड़ की धनराशि की बचत हुई.
केरोसिन मुक्त राज्य घोषित होने के पहले दिल्ली में ब्लू रंग के केरोसिन ऑयल की बिक्री की जाती थी, जिसकी बिक्री व उपयोग अब पूरी तरह से प्रतिबंधित है. यदि कोई व्यक्ति इस केरोसिन की बिक्री के कार्य में संलिप्त पाया जाता है तो उसके खिलाफ इसेंसियल कमोडिटी एक्ट 1955 और दिल्ली केरोसिन ऑयल कंट्रोल एक्ट 1962 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी.
दिल्ली नगर निगम द्वारा फॉगिंग के लिए प्रयोग किया जाने वाला सफेद रंग का बिना सब्सिडी वाला केरोसिन तेल कंपनियों के आउटलेट पर उपलब्ध है.
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