सर्वोच्च न्यायालय ने 2 जून 2014
को मुंबई बम बिस्फोट के दोषी याकूब अब्दुल रज्जाक की फांसी पर
अंतरिम रोक लगाई. याकूब ने 20 वर्ष से लगातार जेल में रहने
के बाद फांसी दिए जाने को दोहरा दंड बताते हुए सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार
याचिका दायर की थी.
पृष्ठभूमि
याकूब अब्दुल रज्जाक वर्ष 1993 में
मुंबई में हुए श्रृंखलाबद्ध बम बिस्फोट के साजिशकर्ताओं में से एक है, जिसमें 257 लोगों की मृत्यु हुई थी. याकूब को
महाराष्ट्र की टाडा न्यायालय एवं महाराष्ट्र उच्च न्यायालय द्वारा दी गई फांसी की
सजा को सर्वोच्च न्यायालय ने 21 मार्च 2013 को सही ठहराते हुए इसपर मुहर लगाई. इस फैसले के बाद याकूब ने सर्वोच्च
न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर कर अपनी फांसी की सजा को उम्रकैद में बदले की
अपील की थी.
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