मीडिया पर निगरानी रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था ‘फ्रीडम हाउस’ ने 1 मई 2014
को ‘मीडिया की आजादी’ पर
जारी विश्व रैंकिग में भारत को 78वां स्थान दिया. वाशिंगटन
स्थित ‘फ्रीडम हाउस’ द्वारा वार्षिक
रूप से यह रिपोर्ट 'फ्रीडम ऑफ प्रेस' नाम
से जारी की जाती है.
‘मीडिया की आजादी’ के मामले में भारत को 78वें स्थान पर रखते हुए, इस संबंध में कहा गया है कि भारत में आम चुनावों से पहले मीडिया संस्थानों के मालिकों के बढ़ते हस्तक्षेप के कारण भारत में प्रेस की आजादी का स्तर गिर गया. वर्ष 2013 के (40 प्वाइंट) के मुकाबले भारत की रैंकिंग एक प्वाइंट घटकर 39 प्वाइंट पहुंच गई है. ‘फ्रीडम हाउस’ ने अपनी रिपोर्ट में भारतीय मीडिया को आंशिक रूप से आजाद की श्रेणी में रखा है.
यह रिपोर्ट ‘फ्रीडम हाउस’ द्वारा वर्ष 1980 से प्रति वर्ष जारी की जाती है. इसमें देशों को शून्य (सबसे अच्छा) से लेकर 100 (सबसे बुरा) प्वाइंट के पैमाने पर मापा जाता है. इसके बाद उन्हें आजाद, आंशिक आजाद और बिल्कुल आजाद नहीं की श्रेणियों में बांटा जाता है.
वर्ष 2014 के इस विश्व मीडिया की आजादी रैंकिग में नीदरलैंड, नॉर्वे और स्वीडन शीर्ष पर हैं. वहीं उत्तर कोरिया को सबसे नीचे जगह मिली है. चीन को ‘बिल्कुल आजाद नहीं’ वाली श्रेणी में रखा गया है, वहीं ‘सबसे खराब रैंकिंग’ बेलारूस, क्यूबा, इक्वाटोरियल गिनी, एरीट्रिया, ईरान, उत्तर कोरिया, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान को मिली है.
विदित हो कि ‘फ्रीडम हाउस’ के मीडिया की आजादी से संबंधित 'फ्रीडम ऑफ प्रेस 2014' विश्व रैंकिंग में 197 देश शामिल किए गए, जिनमें 63 देशों की मीडिया आजाद, 68 देशों की आंशिक रूप से आजाद और 66 देशों की बिल्कुल आजाद नहीं वाली श्रेणी में रखी गई.
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