राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने 8 मई 2014 को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में
भारत का पहला स्वदेशी भुगतान कार्ड ‘रुपे’ राष्ट्र को समर्पित किया.
‘रुपे’ स्वदेश निर्मित भुगतान कार्ड है, जिसके जरिये भुगतान करने हेतु घरेलू स्तर पर ‘नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआइ) द्वारा विकसित नियंत्रण तंत्र है. एनपीसीआइ द्वारा विकसित यह नियंत्रण तंत्र दुनिया का सातवां पेमेंट गेटवे है. ‘वीजा’ और ‘मास्टरकार्ड’ की तरह अब ग्राहकों के भुगतान संबंधी सत्यापन का काम ‘रुपे’ के जरिये किया जा सकेगा. ‘रुपे’ कार्ड देश में मौजूद सभी एटीएम में स्वीकार किया जाएगा. इसके अलावा देश की मौजूदा सभी ई-कॉमर्स वेबसाइटों पर यह कार्ड स्वीकार होगा.
‘रुपे’ के माध्यम से
बैंकों के अलावा वित्तीय एवं वाणिज्यिक संस्थान इस तंत्र से जुड़े कार्ड जारी करके
ग्राहकों को विस्तृत भुगतान सुविधाएं उपलब्ध करा सकेंगे. इसके साथ ही साथ ‘रुपे’ माध्यम (नेटवर्क) से जुड़े कार्डो का इस्तेमाल
एटीएम, पीओएस और ऑनलाइन खरीदारी के दौरान किया जा सकेगा. इस
सिस्टम के तहत ट्रांजेक्शन घरेलू स्तर पर प्रोसेस किए जाएंगे. इसके चलते ‘क्लीयरिंग’ और ‘सेटलमेंट’
की लागत कम होगी. साथ ही साथ भारतीय बैंकों को विदेशी मुद्रा के
बजाय भारतीय मुद्रा में भुगतान करने का लाभ मिलेगा.
विदित हो कि राष्ट्रपति द्वारा औपचारिक रूप से ‘रुपे’ को राष्ट्र को समर्पित किए जाने के पूर्व से ही देश के करीब 250 से ज्यादा बैंक ‘रुपे’ कार्ड जारी कर रहे हैं. अप्रैल 2014 तक ऐसे 2 करोड़ कार्ड जारी हो चुके थे. जिनमें सबसे ज्यादा संख्या किसान क्रेडिट कार्डो की थी
विदित हो कि राष्ट्रपति द्वारा औपचारिक रूप से ‘रुपे’ को राष्ट्र को समर्पित किए जाने के पूर्व से ही देश के करीब 250 से ज्यादा बैंक ‘रुपे’ कार्ड जारी कर रहे हैं. अप्रैल 2014 तक ऐसे 2 करोड़ कार्ड जारी हो चुके थे. जिनमें सबसे ज्यादा संख्या किसान क्रेडिट कार्डो की थी
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